24 घंटे में पैसा 10 गुना करने का दावा पड़ा भारी, जालसाजों ने ठगे लाखों रुपये
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से ऑनलाइन धोखाधड़ी (साइबर ठगी) का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पचपेड़ी क्षेत्र में रहने वाले एक सीधे-साधे किसान को महज 24 घंटे के भीतर रकम को दस गुना करने का लालच देकर शातिर जालसाजों ने ₹21 लाख से अधिक की चपत लगा दी। ठगों के बुने जाल में फंसकर पीड़ित किसान ने एक-दो बार नहीं, बल्कि अलग-अलग बहानों से कुल 160 बार ऑनलाइन पैसे ट्रांसफर किए।
टेलीग्राम लिंक के जरिए जाल में फंसा किसान
पचपेड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम भरारी (बाड़ापारा) के निवासी नारायण सिंह राज (38 वर्ष) पेशे से किसान हैं और गाँव में ही साइकिल सुधारने की एक छोटी सी दुकान भी चलाते हैं। पीड़ित ने बताया कि वह अपने मोबाइल पर टेलीग्राम का उपयोग करते हैं। वर्ष 2024 में अक्टूबर के महीने में उनके पास एक अज्ञात लिंक आया, जिस पर क्लिक करते ही वे एक अनजान ग्रुप में शामिल हो गए। इस ग्रुप को चलाने वालों ने खुद को विदेशी मुद्रा व्यापार (फॉरेक्स ट्रेडिंग) का विशेषज्ञ बताया। उन्होंने नारायण को झांसा दिया कि यदि वे ₹10,000 का निवेश करते हैं, तो उन्हें अगले 24 घंटे में ₹1 लाख वापस मिलेंगे और इसमें डूबी रकम की वापसी (मनी बैक) की पूरी गारंटी है। शुरुआत में मुनाफा कमाने का भरोसा देकर ठगों ने उनसे लगातार निवेश करवाना शुरू कर दिया।
160 बार किया ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, ऐसे खुला राज
शिकायत के मुताबिक, पीड़ित ने जालसाजों के झांसे में आकर अलग-अलग समय अवधि के दौरान अपने इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के खातों से यूपीआई (UPI) के माध्यम से कुल 160 बार पैसे भेजे। इस तरह उन्होंने कुल ₹21,32,000 ठगों के खातों में जमा कर दिए। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब उन्हें एक भी रुपया वापस नहीं मिला, तब उन्हें अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ। इसके बाद पीड़ित किसान ने स्थानीय थाने पहुंचकर पूरे 46 पन्नों का बैंक ट्रांजेक्शन चार्ट और लिखित शिकायत पुलिस को सौंपी।
तफ्तीश में जुटी पुलिस
किसान द्वारा पेश किए गए 46 पेजों के लंबे ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड को देखकर खुद पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। पचपेड़ी थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस और साइबर सेल की टीमें मिलकर बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुट गई हैं।


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