शरद पवार की सियासी चाल पर नजर, BJP के साथ गठबंधन से बदल सकते हैं संसद के समीकरण
मुंबई:महाराष्ट्र के सियासी हलकों में बुधवार को उस समय अचानक हलचल तेज हो गई जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार विधान भवन परिसर पहुंचे. वहां उन्होंने राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से वन-टू-वन मुलाकात की, जिसके बाद सूबे की राजनीति का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. इस औचक बैठक के बाद से ही कयासों का बाजार गर्म है और महाविकास अघाड़ी (एमवीए) के भीतर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है. गठबंधन के प्रमुख घटक दलों ने इस कदम पर अपनी गहरी आपत्ति दर्ज कराई है, जिससे आगामी चुनावों से पहले विपक्षी एकजुटता पर एक बड़ा संकट मंडराता हुआ दिखाई दे रहा है.
गठबंधन सहयोगियों का फूटा गुस्सा, साख पर उठाए गंभीर सवाल
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के तुरंत बाद महाविकास अघाड़ी के खेमे में असंतोष की लहर दौड़ गई है. शिवसेना (यूबीटी) के शीर्ष नेतृत्व ने इस बैठक को लेकर बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता ने सीधे तौर पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि राज्य की सत्ता पर काबिज नेताओं को इस तरह राजनीतिक मान्यता देना जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने जैसा है. उनका तर्क है कि जिस नेतृत्व ने पूर्ववर्ती सरकार को गिराने का काम किया, उनके आधिकारिक कक्ष में जाकर चर्चा करने से वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक विश्वसनीयता पर आंच आती है. विपक्षी खेमे के भीतर यह सवाल पुरजोर तरीके से उठाया जा रहा है कि बैठक के लिए किसी तटस्थ स्थान के बजाय उपमुख्यमंत्री के दफ्तर को ही क्यों चुना गया.
कांग्रेस ने भी जताई असहमति, मुलाकात टालने की दी सलाह
इस राजनीतिक घटनाक्रम पर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी अपनी सधी हुई लेकिन स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है. सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता ने कहा कि वर्तमान नाजुक राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इस बैठक को आसानी से टाला जा सकता था. हालांकि उन्होंने शरद पवार के लंबे तजुर्बे और कद का सम्मान करते हुए यह भी माना कि वरिष्ठता के नाते कई बार अन्य नेता उनसे मशविरा करने आते हैं, लेकिन मौजूदा माहौल में इस तरह के संवाद से गठबंधन के सहयोगियों के बीच संशय पैदा होना स्वाभाविक है. कांग्रेस नेतृत्व के अनुसार, इस कदम से विशेष रूप से ठाकरे गुट के भीतर भारी असुरक्षा और नाराजगी की भावना पैदा हुई है, जो गठबंधन के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है.
सांसदों के दल-बदल की अटकलें तेज, पुराना इतिहास बना चर्चा का विषय
इस बैठक के बाद से सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि क्या शरद पवार की पार्टी के भीतर भी कोई नया समीकरण आकार ले रहा है. वर्तमान में संसद के भीतर दोनों गठबंधनों का गणित बेहद दिलचस्प मोड़ पर है, जहां हाल के दिनों में कई जनप्रतिनिधियों के इधर से उधर होने की खबरें आती रही हैं. राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा देश के अन्य राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल और दिल्ली के पुराने उदाहरणों का हवाला दिया जा रहा है, जहां प्रमुख क्षेत्रीय दलों के सांसदों ने समय-समय पर पाला बदला है. इसी पृष्ठभूमि में अब कयास लगाए जा रहे हैं कि एनसीपी के मौजूदा सांसदों के रुख को लेकर भी आने वाले दिनों में स्थिति बदल सकती है.


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