बरेली वाले भैरवनाथ का अद्भुत दरबार, जहां बाबा को चढ़ता है मदिरा और सिगरेट, सावन में लगती है जमकर भीड़
सावन का पावन महीना शुरू होने वाला है. पूरे देश में शिवभक्ति का माहौल है. नाथ नगरी बरेली के प्राचीन शिवालयों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी है. आज हम आपको बरेली के गुलाम नगर स्थित लगभग 500 वर्ष पुराने ऐतिहासिक भैरवनाथ मंदिर लेकर चलेंगे, जहां की परंपरा देश के अन्य मंदिरों से बिल्कुल अलग है. यहां बाबा भैरवनाथ को लड्डू-बर्फी के साथ मदिरा और सिगरेट का भी भोग लगाया जाता है. इस अनोखी परंपरा के पीछे गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी हुई है.
रानी साहब के निजी घाट, गुलाम नगर स्थित यह प्राचीन भैरवनाथ मंदिर नाथ नगरी बरेली की प्रमुख आस्था स्थलों में से एक है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाबा भैरवनाथ भगवान शिव के रुद्र स्वरूप हैं और सावन के महीने में उनके दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई पूजा से भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
बाबा पूरी करते हैं मनोकामनाएं
मंदिर के पुजारी पंडित जुगल किशोर बताते हैं कि यह मंदिर लगभग 500 वर्ष पुराना है. यहां रविवार को विशेष भोग लगाया जाता है, जबकि मंगलवार और शनिवार को भक्तों की सबसे अधिक भीड़ रहती है. श्रद्धालु बाबा को मदिरा, सिगरेट, गुड़ की भेली, लड्डू, बर्फी, हार-फूल और अन्य प्रसाद अर्पित करते हैं. स्थानीय मान्यता है कि बाबा अपने भक्तों की श्रद्धा को स्वीकार कर उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं.
श्रद्धालुओं की लगी रहती है भीड़
सावन के दौरान हरिद्वार, रामगंगा और कछला घाट की ओर जाने वाले कांवड़िए भी इस मंदिर में माथा टेककर आशीर्वाद लेते हैं. मंदिर से उन्हें सुरक्षा का डोरा और भभूत दी जाती है, जिसे शुभ माना जाता है. मंदिर प्रतिदिन सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक और शाम 5 बजे से रात 9 बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है. सावन के पूरे महीने यहां सुबह से देर रात तक आस्था का जनसैलाब उमड़ता है.


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