फेफड़ों की बीमारी का समय रहते पता लगाना है जरूरी, जानिए शुरुआती संकेत
फेफड़ों का कैंसर (लंग्स कैंसर) आज के समय में पूरी दुनिया में लगातार बढ़ती हुई सबसे गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुमान के अनुसार, हर साल दुनिया भर में 25 लाख से अधिक लोगों में फेफड़ों के कैंसर की पुष्टि होती है, और इस घातक बीमारी की वजह से 18 लाख से ज्यादा लोगों की जान चली जाती है। आमतौर पर यह माना जाता है कि यह समस्या केवल धूम्रपान करने वालों को अपना शिकार बनाती है, लेकिन यह उन लोगों को भी अपनी चपेट में ले सकता है जिन्होंने अपने जीवन में कभी सिगरेट या तंबाकू को हाथ तक नहीं लगाया है। विशेष रूप से भारत में इसके बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा और मुख्य कारण इस समस्या का समय रहते शुरुआती चरण में निदान (Diagnosis) न हो पाना है। अधिकांश मामलों में शुरुआत के दौरान फेफड़ों के कैंसर के कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन शरीर द्वारा दिए जाने वाले कुछ सूक्ष्म संकेतों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। यदि इस बीमारी का समय पर पता चल जाए और सही इलाज मिल जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। आइए जानते हैं कि वे कौन-से प्रमुख लक्षण हैं जिन पर हर व्यक्ति को गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
फेफड़ों का कैंसर और इसके शुरुआती संकेत
दुनियाभर में लंग्स कैंसर को लेकर जन-जागरूकता फैलाने, इस बीमारी का समय रहते पता लगाने और इससे पीड़ित लोगों की हरसंभव मदद करने के उद्देश्य से हर साल 1 अगस्त को 'वर्ल्ड लंग कैंसर डे' (विश्व फेफड़ों का कैंसर दिवस) मनाया जाता है। इसकी शुरुआत साल 2012 में 'फोरम ऑफ इंटरनेशनल रेस्पिरेटरी सोसाइटीज' द्वारा की गई थी।
अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर एक बेहद गंभीर बीमारी है, जिसके प्रति सभी नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। ज्यादातर मामलों में फेफड़े का कैंसर तब तक किसी भी तरह के लक्ष्ण पैदा नहीं करता है, जब तक कि यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल न जाए। इसके कई शुरुआती लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम या अन्य मौसमी बीमारियों से काफी हद तक मिलते-जुलते होते हैं, यही मुख्य कारण है कि लोग इसे आम बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और समय पर इसका सही निदान नहीं हो पाता है। इसलिए अपने व्यक्तिगत जोखिम कारकों को समझते हुए इससे बचाव के उपाय करना बेहद जरूरी है।
इन शुरुआती लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
चिकित्सकों का कहना है कि यदि नीचे दिए गए कुछ लक्षण शरीर में लंबे समय तक बने रहें और सामान्य दवाइयों से भी कोई राहत न मिले, तो बिना देर किए किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से अपनी जांच करानी चाहिए:
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कई हफ्तों तक लगातार रहने वाली या समय के साथ और अधिक गंभीर होने वाली खांसी।
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सीने में लगातार और असहज दर्द रहना, जो गहरी सांस लेते वक्त, खांसते समय या हंसने पर और अधिक बढ़ जाए।
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आवाज का अचानक बैठ जाना या लंबे समय तक गले का कर्कश बना रहना।
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शरीर में बिना किसी स्पष्ट कारण के तेजी से वजन का कम होना।
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सीने में भारीपन, सांस फूलना या सामान्य कामकाज के दौरान सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई होना।
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शरीर में हर वक्त भारी थकान और कमजोरी का अहसास बने रहना।
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बार-बार निमोनिया की शिकायत होना या सांस से जुड़ा कोई भी संक्रमण पूरी तरह से ठीक न होना।
कैंसर के अन्य अंगों तक फैलने पर क्या होती हैं दिक्कतें?
यदि फेफड़ों का कैंसर बढ़कर शरीर के दूसरे अंगों तक पहुँच जाता है, तो इसके लक्षण और अधिक गंभीर रूप ले सकते हैं। ऐसी स्थिति में मरीजों को निम्नलिखित शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:
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हड्डियों में, विशेषकर पीठ या कूल्हों के हिस्से में लगातार और तेज दर्द रहना।
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सिरदर्द, चक्कर आना, या शरीर के किसी खास हिस्से में अचानक कमजोरी या सुन्नपन महसूस होना।
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चलने-फिरने में कठिनाई होना या शरीर का संतुलन बनाने में परेशानी आना।
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त्वचा और आंखों का रंग पीला पड़ जाना।
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गर्दन, कॉलरबोन या शरीर के अन्य हिस्सों में लिम्फ नोड्स (Lymph nodes) में सूजन आ जाना।
किन बातों का ध्यान रखकर कम किया जा सकता है जोखिम?
फेफड़ों के कैंसर के खतरे से बचने के लिए केवल धूम्रपान से दूरी बनाना ही काफी नहीं है। यदि आप स्मोकिंग नहीं भी करते हैं, तब भी आपको सेकेंडहैंड स्मोक (दूसरों के धुएं), खतरनाक प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय जोखिम कारकों से बचना बहुत जरूरी है।
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हमेशा कोशिश करें कि उन जगहों और लोगों से दूरी बनाकर रखें जो धूम्रपान करते हैं ताकि आपके फेफड़ों तक जहरीला धुआं न पहुँचे।
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अपने दैनिक खानपान में ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां और सभी आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार को शामिल करें।
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नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम, योग और प्राणायाम जैसे श्वास संबंधी अभ्यास करने से फेफड़ों की कार्यक्षमता (Lung capacity) मजबूत बनी रहती है।
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यदि आपके परिवार में पहले कभी किसी को फेफड़ों के कैंसर का इतिहास रहा है या आपके शरीर में लंबे समय से कोई संदिग्ध लक्षण बने हुए हैं, तो डॉक्टर की सलाह लेकर समय-समय पर अपनी स्वास्थ्य जांच कराना सबसे सुरक्षित और समझदारी भरा कदम साबित हो सकता है।


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