चंडीगढ़: पंजाब राज्य में मानसून के शुरुआती दौर यानी जुलाई के महीने के दौरान बादलों की बेरुखी साफ तौर पर देखने को मिली है। मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस समयावधि में राज्य भर में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे प्रशासनिक और कृषि हलकों में चिंता का माहौल बन गया है।

अधिकांश जिलों में सूखे जैसे हालात और असमान वर्षा का दौर

राज्य के गिने-चुने क्षेत्रों को छोड़कर लगभग सभी जिलों में मानसून कमजोर साबित हुआ है। कुछ विशिष्ट स्थानों पर भारी पानी जरूर बरसा है, लेकिन अधिकांश जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से बेहद नीचे रहा है, जिससे किसानों के माथे पर बल पड़ गए हैं।

प्रमुख जलाशयों और बांधों में जलस्तर में आई भारी गिरावट

पड़ोसी राज्यों में स्थित मुख्य बांधों और जलाशयों में भी पानी का भंडारण पिछले वर्षों की तुलना में काफी कम दर्ज किया गया है। जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक बांधों का यह घटता स्तर आने वाले दिनों में कृषि के लिए सिंचाई जल और बिजली उत्पादन के मोर्चे पर बड़ी चुनौती खड़ी कर सकता है।

मौसम में आए बदलाव और भौगोलिक कारणों से प्रभावित हुआ चक्र

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक जलवायु में आ रहे बदलावों और मौसमी प्रणालियों के रुख में फेरबदल के कारण मानसूनी हवाएं उस प्रकार सक्रिय नहीं हो पाईं जैसी उम्मीद थी। नमी वाली हवाओं का रुख सही दिशा में न होने के कारण अपेक्षित बारिश नहीं हो सकी है।

अब आगामी माह के दौरान होने वाली बारिश पर टिकी सबकी निगाहें

जुलाई के महीने में हुई निराशाजनक बारिश के बाद अब कृषि जगत और प्रशासन की पूरी उम्मीदें आने वाले दिनों के मौसम पर टिक गई हैं। यदि आने वाले कुछ हफ्तों में अच्छी वर्षा नहीं होती है तो राज्य में जल संकट और अधिक गहरा सकता है।