बीजेपी में अंदरूनी नाराजगी का असर? निकाय चुनाव सूची बदलने से सियासत तेज
जयपुर। राजस्थान में आगामी स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। संगठन स्तर पर रणनीतिक बदलावों और समितियों के गठन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को निम्नलिखित चार उप-शीर्षकों के माध्यम से समझा जा सकता है:
संभागीय चुनाव संचालन समिति की सूची में संशोधन
भारतीय जनता पार्टी द्वारा जारी की गई संभागीय चुनाव संचालन समिति की पहली सूची में तुरंत संशोधन करना पड़ा। कई नेताओं को उनके गृह जिलों और गृह संभागों में चुनाव प्रभारी बनाए जाने को लेकर संगठन के भीतर आपत्तियां और विरोध के स्वर उठे थे, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व को नई संशोधित सूची जारी करनी पड़ी।
गृह क्षेत्रों में प्रभार को लेकर उठा विवाद
पार्टी की पुरानी परंपरा और नियमों के तहत आमतौर पर किसी भी नेता को उसके गृह क्षेत्र या गृह संभाग का चुनाव प्रभारी नहीं बनाया जाता है ताकि स्थानीय गुटबाजी और हितों के टकराव से बचा जा सके। संगठनात्मक बैठक में इस मुद्दे के प्रमुखता से उठने के बाद जिम्मेदारियों में फेरबदल का यह निर्णय लिया गया।
प्रमुख नेताओं की जिम्मेदारियों में बड़े बदलाव
संशोधित सूची के तहत कई वरिष्ठ नेताओं के कार्यक्षेत्र बदले गए हैं। राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी को संभागीय समिति से हटाकर स्थानीय निकाय चुनाव की घोषणा पत्र समिति में जयपुर की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि उनकी जगह अन्य वरिष्ठ नेताओं को विभिन्न संभागों के चुनाव प्रभार की कमान सौंपी गई है।
घोषणा पत्र समिति का गठन और नई नियुक्तियां
चुनावी तैयारियों को रफ्तार देते हुए भाजपा ने स्थानीय निकाय चुनावों के लिए एक अलग घोषणा पत्र समिति का भी गठन किया है। इसके साथ ही संगठनात्मक मजबूती के लिए कई नवगठित जिलों में कार्यवाहक जिला अध्यक्षों की नई नियुक्तियां भी की गई हैं, जिसे पार्टी नेतृत्व ने एक सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बताया है।


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