इंदौर में बड़े प्रोजेक्टों पर फोकस, मगर पानी और सड़कों पर अधूरा रहा काम
इंदौर| देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में नगर निगम की मौजूदा भाजपा परिषद का चार साल का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। अब से ठीक एक साल बाद शहर में एक बार फिर नगर निगम के चुनाव होने हैं। हालांकि भाजपा परिषद अपने इन चार वर्षों के कामकाज को संतोषजनक मान रही है, लेकिन इस दौरान बड़े-विकास प्रोजेक्टों पर जोर दिए जाने के बावजूद शहरवासियों को दूषित पानी की आपूर्ति और गड्ढों से भरी खस्ताहाल सड़कों जैसी बुनियादी समस्याओं से लगातार जूझना पड़ा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शहर की मूलभूत समस्याओं का समाधान करने के मामले में मौजूदा परिषद पिछली परिषदों के मुकाबले थोड़ी कमजोर नजर आई है। हालांकि, शहर की नंबर-1 सफाई व्यवस्था को बरकरार रखने में निगम पूरी तरह कामयाब रहा है। शहर में अभी भी कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिन्हें आगामी कार्यकाल में पूरा होना है। इसके अलावा, डेढ़ साल बाद पड़ोसी जिले उज्जैन में 'सिंहस्थ महाकुंभ' का आयोजन भी होना है, ऐसे में इंदौर से जुड़े सिंहस्थ के कार्यों को समय पर पूरा करना भी भाजपा परिषद के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होगा।
भागीरथपुरा पेयजल कांड रहा सबसे बड़ा धब्बा
बीते चार सालों में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुआ दूषित पेयजल कांड नगर निगम के कार्यकाल पर सबसे बड़ा दाग साबित हुआ। पिछले साल नर्मदा की पाइपलाइन में गंदा पानी मिलने के कारण फैले डायरिया और संक्रमण से 35 से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और डेढ़ हजार से ज्यादा लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए थे। इस एक घटना ने देश भर में इंदौर नगर निगम की साख को गहरा धक्का पहुंचाया। इसके अलावा, शहर के कई अन्य इलाकों में आज भी दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायतें बनी हुई हैं। इस साल मानसून में हुई देरी के कारण शहर में गंभीर जलसंकट भी पैदा हो गया था, जिसके चलते बोरिंग सूखने पर निगम को 500 से अधिक टैंकर किराए पर चलाने पड़े, तब जाकर जलापूर्ति सुचारू हो सकी।
100 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले का साया
भाजपा परिषद के इसी कार्यकाल के दौरान शहर में 100 करोड़ रुपये का एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ। हालांकि यह वित्तीय अनियमितता पुरानी परिषद के समय से चली आ रही थी, लेकिन कागजों पर बिना काम हुए ही फाइलें तैयार होती रहीं और बिल भी पास होते रहे। जिन जिम्मेदार अधिकारियों को धरातल पर कार्यों का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) करना था, वे भी इस मिलीभगत में शामिल पाए गए। वर्तमान में इस पूरे घोटाले की जांच चल रही है, और हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में आरोपियों की करोड़ों रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं।
निगम परिषद द्वारा शुरू किए गए प्रमुख विकास कार्य:
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सोलर प्लांट की स्थापना: नर्मदा परियोजना के बिजली बिलों पर हर साल खर्च होने वाले सैकड़ों करोड़ रुपये की बचत के लिए निगम ने महेश्वर के पास जलूद में 300 करोड़ रुपये की लागत से सोलर प्लांट लगवाया है, जिससे हर महीने करीब 5 करोड़ रुपये की भारी बचत हो रही है।
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नर्मदा चतुर्थ चरण परियोजना: भविष्य में शहर को पानी की किल्लत से बचाने के लिए लगभग 1,500 करोड़ रुपये की लागत से नर्मदा प्रोजेक्ट के चौथे चरण का काम शुरू कराया गया है।
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सड़क चौड़ीकरण: मास्टर प्लान की 23 सड़कों के निर्माण के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, और फिलहाल शहर की 10 से अधिक प्रमुख सड़कों पर बाधक निर्माण हटाकर चौड़ीकरण का कार्य जारी है।
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हुकमचंद मिल की जमीन का समाधान: लंबे समय से अटके हुकमचंद मिल के भूखंड विवाद का समाधान निकालते हुए श्रमिकों को उनके हक का पैसा दिलाया गया है, और अब इस 40 एकड़ जमीन पर हाउसिंग बोर्ड द्वारा नया प्रोजेक्ट लाया जा रहा है।
वे कार्य जो अब तक पूरे या शुरू नहीं हो सके:
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नेहरू स्टेडियम का आधुनिकीकरण: करीब 50 साल पुराने नेहरू स्टेडियम के स्थान पर एक आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाना था, जो अब तक शुरू नहीं हो सका है।
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आधिकारिक वेबसाइट का अभाव: नगर निगम की अपनी खुद की व्यवस्थित वेबसाइट अभी तक तैयार नहीं हो पाई है, जिसके कारण नागरिकों को कई जरूरी ऑनलाइन सुविधाएं एक क्लिक पर नहीं मिल पा रही हैं।
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अधूरी एमआर-4 सड़क: एमआर-4 (MR-4) सड़क का निर्माण कार्य अभी भी अधूरा पड़ा है, और यह सड़क नए बस स्टैंड से ठीक से नहीं जुड़ पाई है।
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यागम यात जाम से मुक्ति: शहर को ट्रैफिक जाम की समस्या से पूरी तरह मुक्त करने का दावा किया गया था, लेकिन धरातल पर यातायात का दबाव अभी भी शहरवासियों के लिए सिरदर्द बना हुआ है।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई योजनाएं
मौजूदा परिषद का दावा है कि उन्होंने आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए दूरदर्शी योजनाएं बनाई हैं। नर्मदा चौथे चरण के पूरा होने से अगले 15 वर्षों तक इंदौर में पेयजल की कोई समस्या नहीं होगी। इसके अलावा, सीवरेज नेटवर्क सुधारने और नई पाइपलाइनों का जाल बिछाने का काम तेजी से किया गया है ताकि बढ़ते शहर की जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सके।


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