जयपुर :राजस्थान में पिछले कुछ महीनों के दौरान सरकारी और ग्रामीण स्कूलों के विद्यार्थियों द्वारा बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन के कई मामले सामने आए हैं। कहीं छात्रों ने स्कूलों के मुख्य द्वारों पर ताले लगाए तो कहीं कलेक्ट्रेट तक लंबी पैदल यात्राएं निकालीं। शिक्षा विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों द्वारा इन स्थानीय आंदोलनों को डिजिटल युग की नई पीढ़ी यानी ‘जेन अल्फा’ के उभरते छात्र आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है।

प्रमुख जिलों में छात्रों के प्रदर्शन और मुख्य वजहें

  • बीकानेर: आवासीय सैनिक स्कूल की 69 छात्राओं ने सामूहिक अवकाश लेकर जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला। उनका मुख्य आरोप था कि सत्र शुरू होने के बावजूद उन्हें समय पर वर्दी और सैन्य प्रशिक्षण से जुड़ी जरूरी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

  • जयपुर: पोद्दार स्कूल में श्रवण एवं वाक् बाधित विद्यार्थियों ने छात्रावास की खराब व्यवस्थाओं और सुविधाओं की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसके बाद सरकार ने तुरंत प्रधानाचार्य को निलंबित कर दिया।

  • अलवर और जालोर: अलवर के थानागाजी क्षेत्र में विद्यार्थियों ने स्कूल परिसर में धरना देकर अपनी माँगे रखीं, जिस पर प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया। वहीं जालोर में शिक्षकों की भारी कमी से परेशान होकर छात्रों ने मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया, जिसके बाद प्रशासन ने तत्काल नए शिक्षकों की व्यवस्था की।

‘जेन जी’ और ‘जेन अल्फा’ आंदोलनों में अंतर

विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया छात्र प्रदर्शनों का दायरा पिछले कुछ वर्षों के ‘जेन जी’ आंदोलनों से काफी अलग है:

  • जेन जी आंदोलन: इसमें मुख्य रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रश्नपत्र लीक और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल रहे हैं, जिनमें शहरी और मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों की भागीदारी अधिक थी।

  • जेन अल्फा आंदोलन: इसके विपरीत, वर्तमान प्रदर्शनों में ग्रामीण इलाकों और सरकारी स्कूलों के छात्र सीधे तौर पर शामिल हैं। उनके मुद्दे दैनिक स्कूल जीवन की बुनियादी जरूरतों जैसे जर्जर भवन, शिक्षकों की कमी, वर्दी और खेल सुविधाओं से जुड़े हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ

विद्यार्थियों के इन आंदोलनों पर विभिन्न राजनीतिक दलों की भी प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं:

  • कांग्रेस: पार्टी नेताओं का मानना है कि नई पीढ़ी पूरी तार्किकता के साथ सवाल पूछ रही है और सरकार को स्कूलों के स्तर से ही सुधार शुरू करने की जरूरत है।

  • भारत आदिवासी पार्टी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी: इन दलों के सांसदों ने इसे विद्यार्थियों के स्वतःस्फूर्त और स्वतंत्र प्रयास बताते हुए समर्थन दिया है, और कहा है कि इंटरनेट व मोबाइल के माध्यम से छात्र अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रहे हैं।

  • भारतीय जनता पार्टी: भाजपा ने इसे लोकतंत्र में अपनी बात रखने का अधिकार बताया है और कहा है कि सरकार संवाद के जरिए विद्यार्थियों की सभी समस्याओं और भ्रमों का समाधान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सरकारी स्कूलों के कायाकल्प की योजना

छात्रों के इन विरोध-प्रदर्शनों के बीच सरकार ने सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर विकास कार्यों का रोडमैप तैयार किया है:

  • नए भवनों का निर्माण: प्रदेशभर में 3,587 नए विद्यालय भवन बनाए जाने की योजना है, जिनमें से कई पर निर्माण कार्य प्रक्रिया में है।

  • कक्षा-कक्ष और सुविधाएं: स्कूलों में जगह की कमी दूर करने के लिए 83,783 नए कक्षा-कक्ष तैयार करने का प्रस्ताव है। साथ ही 13,616 नए शौचालय परिसरों का निर्माण भी किया जाएगा।

  • मरम्मत और वित्तीय प्रावधान: जर्जर भवनों की बड़े पैमाने पर मरम्मत के लिए 22,589 विद्यालयों को शामिल किया गया है, जिसके लिए 1,129.45 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। कुल मिलाकर करीब 3,006 करोड़ रुपये के विकास कार्य विभिन्न चरणों (स्वीकृति, निविदा या क्रियान्वयन) में चल रहे हैं।