ग्वालियर। शहर की बदहाल और गड्ढों से भरी सड़कों की स्थिति पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने प्रशासनिक तंत्र, संबंधित अधिकारियों और निर्माण ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए उन्हें सख्त फटकार लगाई है।

गुणवत्ता में धांधली पर दर्ज होगा क्रिमिनल केस

अदालत ने सख्त चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि सड़कों की गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट में किसी भी तरह की धांधली या वित्तीय अनियमितता सामने आती है, तो दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर सिर्फ दीवानी ही नहीं, बल्कि आपराधिक (क्रिमिनल) मुकदमे भी दर्ज किए जाएंगे। सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 100 रुपये के आवंटन पर यदि महज 10 रुपये ही धरातल पर खर्च दिखेंगे, तो कार्रवाई होना तय है।

पारदर्शी जांच के लिए सैंपलिंग का नया फॉर्मूला तैयार

सड़कों के नमूनों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए हाईकोर्ट ने एक विशेष व्यवस्था तय की है। इसके तहत आगामी 30 अगस्त, 3 सितंबर और 6 सितंबर को शहर के विभिन्न इलाकों से अचानक सैंपल एकत्र किए जाएंगे। किस सड़क से नमूना लिया जाना है, इसकी सूचना संबंधित टीम को कार्रवाई से महज 30 मिनट पहले दी जाएगी, ताकि मौके पर किसी प्रकार की लीपापोती या तात्कालिक मरम्मत न की जा सके।

मौके पर सील होंगे सैंपल, विशेषज्ञों की टीम रहेगी तैनात

सैंपलिंग की पूरी प्रक्रिया के दौरान वकीलों का विशेष कमीशन और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मौके पर मौजूद रहेगी। एकत्र किए गए नमूनों को पारदर्शी तरीके से घटना स्थल पर ही सील करके निष्पक्ष प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। अदालत के इस सख्त कदम का मुख्य उद्देश्य शहर की जर्जर सड़कों की वास्तविक स्थिति सामने लाना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है।