महिला समानता पर सुनीता राजवार ने रखी बेबाक बात, बोलीं- अपनी मानसिकता बदलनी होगी
मुंबई। ‘पंचायत’ और ‘गुल्लक’ जैसी लोकप्रिय वेब सीरीज में अपनी बेहतरीन अदायगी से पहचानी जाने वाली अभिनेत्री सुनीता राजवार ने हाल ही में फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं के किरदारों, समानता और अपने संघर्षों को लेकर खुलकर बात की।
शुरुआत में सिटी का नाम और पूर्णविराम देने तथा किसी भी वेबसाइट का नाम हटाने के बाद, सुनीता राजवार के साक्षात्कार के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
महिलाओं के किरदारों में बदलाव और सम्मानजनक रोल
सुनीता मानती हैं कि फिल्म इंडस्ट्री में अब बदलाव आया है और परिदृश्य काफी बदला है। ‘मर्दानी’, ‘पिंक’ और ‘कहानी’ जैसी फिल्मों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब महिलाओं को सिर्फ एक प्रोडक्ट की तरह उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि उनके रोल महत्वपूर्ण होते हैं। हालांकि, उनका यह भी मानना है कि अभी भी फिल्मों में महिलाओं को और बेहतर व सम्मानजनक किरदार मिलने की आवश्यकता है। कहानियों में फालतू के दृश्यों या आइटम सॉन्ग के बजाय महिलाओं की सार्थक उपस्थिति होनी चाहिए।
सुविधाओं और संघर्षों का यथार्थ
इंडस्ट्री में मिलने वाली सुविधाओं पर बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शुरुआती दौर में किसी भी नए कलाकार (चाहे वह महिला हो या पुरुष) को वो सुविधाएं नहीं मिलतीं जो एक बड़े या पॉपुलर स्टार को मिलती हैं। जैसे-जैसे कलाकार इंडस्ट्री में मुकाम हासिल करते जाते हैं, चीजें मिलने लगती हैं।
रिस्पेक्ट और पेमेंट में बराबरी
महिलाओं के वेतन और सम्मान पर उनका कहना है कि पुरुषों के समान ही आदर और पेमेंट होना चाहिए, जो काफी हद तक कलाकार के मार्केट और मुकाम पर निर्भर करता है। उन्होंने उदाहरण दिया कि दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी को अपने समय में कई पुरुष अभिनेताओं से ज्यादा भुगतान मिलता था।
खुद को बेचारा समझना छोड़ना होगा
महिलाओं की स्थिति पर बात करते हुए सुनीता ने जोर देकर कहा कि औरतों को खुद को बेचारा समझना बंद करना पड़ेगा। समाज का निर्माण हम खुद करते हैं, इसलिए महिलाओं को खुद को सक्षम मानना होगा और अपना नजरिया बदलना होगा।
नए कलाकारों के साथ व्यवहार का अनुभव
अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए उन्होंने साझा किया कि जब वह दो-तीन दिन के छोटे रोल करती थीं, तो उनका ध्यान इस बात पर नहीं जाता था कि उनके साथ कैसा व्यवहार हो रहा है। छोटे कलाकारों को अच्छे कमरे न मिलने जैसी बातें शुरुआती दौर में महसूस होती हैं, लेकिन यह किसी एक व्यक्ति के साथ नहीं बल्कि हर नए कलाकार के साथ होता है।
मानसिकता में बदलाव की जरूरत
बराबरी के मुद्दे पर सुनीता का मानना है कि प्रकृति ने सभी को एक जैसा बनाया है और बराबरी असल में है ही। समस्या हमारी मानसिकता में है, जिसके कारण हम खुद को कम या ज्यादा आंकते हैं। हमें अपनी सोच बदलकर सबको समान नजर से देखना और बराबर समझना होगा।


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