मुंबई: महाराष्ट्र के प्रसिद्ध गणेशोत्सव को लेकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने बड़ा और तीखा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मुंबई का गणेशोत्सव धीरे-धीरे कॉरपोरेट संस्कृति और उद्योगपतियों के नियंत्रण में जाता जा रहा है, जिसे लेकर उन्होंने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कॉरपोरेट संस्कृति और परंपरा पर सवाल

मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मनसे नेता संदीप देशपांडे ने विशेष रूप से लालबागचा राजा गणेश मंडल की कार्यशैली पर कड़ा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव महाराष्ट्र की माटी और मराठी समाज की समृद्ध परंपराओं का प्रतीक है, लेकिन इसमें लगातार कॉरपोरेट दखल बढ़ता जा रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि ऐसा ही चलता रहा, तो आने वाले समय में हमारे पारंपरिक त्योहारों की पहचान उद्योगपतियों और बड़ी कंपनियों के नाम से होने लगेगी।

अनंत अंबानी की भूमिका पर आपत्ति

संदीप देशपांडे ने लालबागचा राजा मंडल से उद्योगपति अनंत अंबानी को जोड़े जाने पर भी एतराज जताया। उन्होंने कहा कि आम श्रद्धालु गणेश मंडलों को दिल खोलकर करोड़ों रुपये का दान देते हैं, ऐसे में मंडलों को उद्योगपतियों के सहारे की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि अनंत अंबानी मंडल को ऐसा कौन सा विशेष ज्ञान या सलाह देते हैं, जो इतने वर्षों से मंडल के पास नहीं था? क्या गणेशोत्सव मंडल को अब कोई कंपनी बनाने की तैयारी चल रही है?

मार्केटिंग और व्यावसायिक हितों पर चेतावनी

मनसे नेता ने चेतावनी देते हुए कहा कि आज अंबानी जुड़े हैं, कल अडानी या अन्य बड़ी कंपनियां जुड़ जाएंगी, जिससे धार्मिक उत्सव सिर्फ मार्केटिंग का जरिया बनकर रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि उद्योगपति अपने व्यावसायिक हितों को ध्यान में रखकर काम करते हैं और धार्मिक उत्सवों का इस्तेमाल मार्केटिंग के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने लालबागचा राजा मंडल के मानद सचिव सुधीर सालवी से भी असहमति जताते हुए कहा कि इस सांस्कृतिक त्योहार को केवल ब्रांडिंग के नजरिए से देखना बिल्कुल सही नहीं है।