नालंदा| सदर अस्पताल में जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द के साथ-साथ शारीरिक जकड़न से परेशान रहने वाले मरीजों को अब हानिकारक दर्दनिवारक दवाओं (पेनकिलर) के दुष्प्रभावों से बड़ी राहत मिलने जा रही है। अस्पताल के फिजियोथेरेपी वार्ड में आधुनिक तकनीक से लैस सात नई अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की गई हैं, जहां लेजर, टेकार और शॉकवेव थेरेपी के माध्यम से मरीजों का प्रभावी इलाज शुरू कर दिया गया है। मौजूदा समय में हर दिन औसतन 60 मरीज इस नई सुविधा का लाभ उठा रहे हैं।

लंबे समय तक बैठने से बढ़ रही हैं हड्डियां और नसें से जुड़ी समस्याएं

विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट शिवकुमार चौधरी के अनुसार, लंबे समय तक एक ही स्थान पर बैठकर काम करने, शारीरिक सक्रियता की कमी और मानसिक तनाव के कारण हड्डियों व नसों की बीमारियां तेजी से पांव पसार रही हैं। ऐसे में फिजियोथेरेपी बिना किसी साइड इफेक्ट के शरीर को फिर से सक्रिय और गतिशील बनाने का एक बेहद सुरक्षित जरिया साबित हो रही है। वार्ड में लगाई गई टेकार थेरेपी मशीन रेडियो तरंगों के जरिए मांसपेशियों की गहराई में छिपे दर्द को कम करती है, जबकि लेजर थेरेपी की मदद से पुरानी और गंभीर चोटों का सटीक उपचार किया जा रहा है।

विभिन्न आधुनिक मशीनों से हो रहा है उपचार

अस्पताल में मरीजों की जरूरत के अनुसार अलग-अलग उन्नत मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है:

  • सीपीएम (CPM) मशीन: सर्जरी के बाद घुटनों की गतिशीलता को वापस लाने के लिए।

  • शॉकवेव मशीन: एड़ी और लिगामेंट से जुड़ी चोटों के इलाज के लिए।

  • लॉन्ग वेव मशीन: पुराने और जिद्दी दर्द में राहत देने वाली गर्माहट के लिए।

  • ट्रेडमिल मशीन: मरीजों को दोबारा सामान्य रूप से चलने का अभ्यास कराने के लिए।

बिना डॉक्टर की सलाह के पेनकिलर लेना खतरनाक

सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने आम जनता को आगाह करते हुए बताया कि शरीर में थोड़ा सा भी दर्द होने पर बिना चिकित्सकीय परामर्श के पेनकिलर का सेवन करना लिवर और किडनी को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। फिजियोथेरेपी दर्द को केवल तात्कालिक रूप से दबाने के बजाय वैज्ञानिक व्यायाम, सही पोश्चर (मुद्रा) और आधुनिक उपकरणों की मदद से उसे जड़ से खत्म करने में सहायता करती है।

8 सितंबर को मनाया जाएगा विश्व फिजियोथेरेपी दिवस

आगामी 8 सितंबर को 'विश्व फिजियोथेरेपी दिवस' मनाया जाएगा, जिसकी इस वर्ष की थीम ‘सक्रिय रहें, स्वस्थ रहें’ निर्धारित की गई है। यह थीम विशेष रूप से हृदय रोगों और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं की रोकथाम में शारीरिक सक्रियता और व्यायाम के महत्व को रेखांकित करती है।