नागौर| राजस्थान के नागौर जिले के बासनी गांव से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ एक मुस्लिम युवक अल्लाहबक्स मुबारक दिलवाली ने राज्य मानवाधिकार आयोग को शिकायत भेजकर एक कथित गैरकानूनी खाप पंचायत के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित युवक का आरोप है कि नागौर सदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पिछले 45 वर्षों से यह खाप पंचायत सक्रिय है और लगातार गांव के लोगों का सामाजिक बहिष्कार करती आ रही है, जिसे उन्होंने मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन बताया है।

शिकायत के बावजूद पुलिस कार्रवाई न होने का आरोप

शिकायतकर्ता अल्लाहबक्स के अनुसार, उन्होंने इस मामले में गत 29 जुलाई 2026 को आधिकारिक रूप से शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने आरोपियों को केवल पाबंद करके जमानत पर रिहा कर दिया। इसके बाद, 15 अगस्त 2026 की रात करीब 10:30 बजे नागौरी कौमी जमात द्वारा बासनी स्थित मंडल जमात खाना में ‘इस्लाह ए मुआशरा’ के नाम से एक पंचायत बुलाई गई। पीड़ित का आरोप है कि समाज सुधार के नाम पर बुलाई गई इस बैठक में खुलेआम उनके और अन्य लोगों के नाम लेकर उन्हें जान से मारने व प्रताड़ित करने की धमकियां दी गईं।

मुखबिर बताने और व्हाट्सएप पर बदनाम करने का षड्यंत्र

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि पंचायत के दौरान एक व्यक्ति को पुलिस का मुखबिर करार देकर पूरे गांव को तबाह करने की धमकी दी गई। इसके अलावा, खाप पंचायत पर यह भी आरोप है कि उसने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर भ्रामक जानकारियां फैलाकर स्थानीय लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काने का प्रयास किया, जिससे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल पैदा हो गया।

अगले ही दिन एक व्हाट्सएप ग्रुप पर अल्लाहबक्स की फोटो पोस्ट करके उन्हें ‘गद्दार’ जैसे आपत्तिजनक शब्द कहे गए। पीड़ित का कहना है कि इसके बाद से गांव के कुछ दबंग लोग उनके परिवार पर लगातार दबाव बना रहे हैं कि वे खाप पंचायत के खिलाफ अपनी शिकायत वापस ले लें और अन्य पीड़ितों की मदद करना बंद कर दें।

मानवाधिकार आयोग से सुरक्षा और कड़ी कार्रवाई की मांग

स्थानीय पुलिस थाने में गुहार लगाने के बाद भी कोई ठोस कानूनी कार्रवाई न होते देख, पीड़ित ने अब सीधे राज्य मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने आयोग से मांग की है कि संबंधित पंचायत के मुखियाओं और दोषी व्यक्तियों के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं। साथ ही, उन्होंने अपने परिवार के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए अवांछित सामाजिक बहिष्कार को समाप्त कर गांव में सामान्य स्थिति बहाल कराने की गुहार लगाई है।

शिकायतकर्ता ने आयोग को भेजे गए अपने आवेदन के समर्थन में बैठक के ऑडियो-वीडियो सबूत, पोस्टर, सोशल मीडिया के स्क्रीनशॉट और पूर्व में दिए गए आवेदनों की प्रतियां भी संलग्न की हैं। यह औपचारिक शिकायत 24 अगस्त 2026 को बासनी, नागौर से दर्ज कराई गई है।