पटना। बिहार में सरकारी भर्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक अहम कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 1 सितंबर को परीक्षा सुधारों के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति हरीश कुमार को इस विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

न्यायमूर्ति हरीश कुमार संभालेंगे समिति की कमान

राज्य में आयोजित होने वाली विभिन्न परीक्षाओं में व्यापक सुधारों की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करने का प्रावधान किया गया था:

  • अध्यक्ष पद पर नियुक्ति: पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति हरीश कुमार को समिति का अध्यक्ष नामित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति देते हुए राज्य सरकार ने इस संबंध में औपचारिक अधिसूचना जारी की है।

  • अध्ययन और अनुशंसा: समिति परीक्षा संचालन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों, सुरक्षा मानकों और प्रशासनिक व्यवस्था का गहन अध्ययन करेगी और आवश्यक सुधारों से जुड़ी विस्तृत अनुशंसाएं सरकार को सौंपेगी।

राज्य की प्रमुख भर्ती एजेंसियां होंगी दायरे में

इस समिति का कार्यक्षेत्र राज्य सरकार के अधीन आने वाले विभिन्न भर्ती आयोगों, बोर्डों और विश्वविद्यालयों तक विस्तृत होगा:

  • प्रभावित होने वाली प्रमुख संस्थाएं: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC), बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC), बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC), बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) और बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) सहित अन्य संबंधित भर्ती एजेंसियां इसके दायरे में आएंगी।

  • परीक्षा प्रणाली की समीक्षा: प्रश्नपत्र निर्माण, मुद्रण, वितरण, परीक्षा केंद्र प्रबंधन और परिणाम तैयार करने से जुड़े सभी पहलुओं को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया

समिति के गठन पर छात्र प्रतिनिधियों ने संतोष व्यक्त किया है। छात्र नेताओं का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ चलाए गए आंदोलनों के दौरान सरकार ने सुधार के लिए ठोस कदम उठाने का आश्वासन दिया था। इस समिति के गठन से राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी चयन प्रणाली स्थापित करने तथा भविष्य में पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी।