मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में शामिल न होकर अचानक दिल्ली पहुंचने से महायुति सरकार में मतभेदों की अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, दिल्ली पहुंचने के बाद उपमुख्यमंत्री ने इन चर्चाओं को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उनका यह दौरा पूर्व-निर्धारित संगठनात्मक बैठकों और कार्यक्रमों के सिलसिले में है, न कि किसी राजनीतिक नाराजगी के कारण।

कैबिनेट बैठक से दूरी और दिल्ली प्रवास का कारण

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई थी, जिससे शिंदे अनुपस्थित रहे:

  • संगठनात्मक व्यस्तता: शिंदे ने स्पष्ट किया कि विभिन्न राज्यों के शिवसेना प्रमुखों के साथ पार्टी संगठन के विस्तार और समीक्षा को लेकर दिल्ली में बैठकें पहले से तय थीं।

  • संवाद की सुगमता: कई नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए मुंबई पहुंचना संभव नहीं था, इसलिए उन्होंने स्वयं दिल्ली आकर बैठकें करने का निर्णय लिया।

  • गठबंधन में मतभेद से इनकार: भाजपा और स्वयं उपमुख्यमंत्री ने किसी भी प्रकार के आंतरिक मनमुटाव से इनकार करते हुए कहा कि उनके पूर्व-निर्धारित कार्यक्रमों की जानकारी पहले से थी।

'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न विवाद पर विपक्ष पर निशाना

दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए शिंदे ने शिवसेना के चुनाव चिह्न को फ्रीज करने की विपक्षी मांग को दुर्भाग्यपूर्ण बताया:

  • पहचान और विचारधारा: उन्होंने कहा कि 'धनुष-बाण' केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे के विचारों और पार्टी की पहचान से जुड़ा है।

  • जनादेश को चुनौती: शिंदे के अनुसार चुनाव चिह्न पर रोक की मांग करना जनता के जनादेश और बालासाहेब के सिद्धांतों का अपमान है। पार्टी इस मामले में अपनी कानूनी लड़ाई मजबूती से जारी रखेगी।

आर्थिक वृद्धि और राष्ट्रीय दृष्टिकोण की सराहना

दौरे के दौरान उपमुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के आर्थिक प्रदर्शन और नीतियों की भी प्रशंसा की:

  • 7.8% जीडीपी वृद्धि: उन्होंने देश की 7.8 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर को एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की।

  • विकसित भारत 2047: शिंदे ने कहा कि देश तीव्र आर्थिक सुधारों के साथ वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ रहा है।