नालंदा। जिले में नदियों का जलस्तर घटने के बाद भले ही प्रशासनिक स्तर पर बाढ़ की स्थिति सामान्य होने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत ग्रामीणों के लिए अब भी कष्टकारी बनी हुई है। सकरी और मुहाने नदी पर बने वैकल्पिक डायवर्सन अब तक चालू नहीं हो सके हैं, जिसके कारण नालंदा और शेखपुरा जिले के दर्जनों गांवों का सीधा संपर्क टूटा हुआ है। संपर्क मार्ग अवरुद्ध होने से लोग लंबा चक्कर लगाने को मजबूर हैं, वहीं सैकड़ों बीघे खेतों में पानी भरा रहने से किसानों की फसलें डूबकर बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गई हैं।

पुल जर्जर और डायवर्सन जलमग्न, 15 की जगह 40 किमी का चक्कर

बिहारशरीफ-कतरीसराय मार्ग पर दरियापुर के निकट पुराना पुल जर्जर होने के कारण आवागमन पहले से प्रतिबंधित है। ग्रामीणों के लिए आवाजाही का एकमात्र साधन सकरी नदी पर बना डायवर्सन था, जो पानी में डूबा हुआ है। इसके चलते मानपुर, पलनी, रहिंचा, कबीरपुर, मैरा और बरीठ समेत कई गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क कट गया है। जो दूरी पहले 12 से 15 किलोमीटर में तय हो जाती थी, उसके लिए अब लोगों को गिरियक-पावापुरी होकर 35 से 40 किलोमीटर या अस्थावां के रास्ते 25 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा लगाना पड़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर मरीजों, विद्यार्थियों और दैनिक कामगारों पर पड़ रहा है।

बिजली के पोल पर 'जुगाड़' की राह, जान जोखिम में डालकर नदी पार

चंडी प्रखंड के सतनाग के पास मुहाने नदी के तेज बहाव में डायवर्सन बह जाने के बाद स्थिति और विकट हो गई है। सतनाग, मलबिगहा, नोनिया बिगहा, अमरौरा, द्वारिका बिगहा और सुमका गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क कट चुका है। सरकारी स्तर पर मरम्मत न होने से परेशान ग्रामीणों ने जोखिम उठाते हुए टूटे हिस्से पर बिजली के पोल बिछाकर कामचलाऊ पुल तैयार किया है। स्कूली बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इसी संकरे पोल के सहारे जान हथेली पर रखकर नदी पार कर रहे हैं, जिससे हर वक्त बड़े हादसे का अंदेशा बना रहता है।

200 बीघे से अधिक खेतों में जलभराव, फसलों पर संकट

अस्थावां प्रखंड के ओंदा में जिरायन नदी का टूटा तटबंध बांध दिए जाने के बाद भी जलजमाव की समस्या जस की तस है। ओंदा, नेरुत, गोमचक, मौलाना बिगहा और भिखनी बिगहा के 200 बीघे से अधिक खेतों में बाढ़ का पानी भरा हुआ है। निकासी की व्यवस्था धीमी होने से खेत तालाब में तब्दील नजर आ रहे हैं। किसानों को डर सता रहा है कि यदि पानी जल्द नहीं निकाला गया तो उनकी पूरी फसल सड़कर बर्बाद हो जाएगी। ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि जब तक संपर्क पथ बहाल नहीं होते और जल निकासी नहीं होती, तब तक हालात सामान्य कहना जमीनी हकीकत से परे है।