BJP पर गुजरात कांग्रेस का बड़ा आरोप, गैर-मान्यता प्राप्त दलों को चंदे की SIT जांच की मांग
नागपुर। गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को वित्तीय वर्ष 2023-24 में मिले भारी-भरकम चंदे को लेकर केंद्र और गुजरात की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। चावड़ा ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की है। उन्होंने दावा किया कि यदि उच्चस्तरीय जांच कराई जाती है, तो इसमें भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं की संलिप्तता और बड़े वित्तीय घालमेल की परतें खुलेंगी।
छह गैर-मान्यता प्राप्त दलों को मिला राष्ट्रीय दलों से अधिक चंदा
नागपुर में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए अमित चावड़ा ने एक खोजी मीडिया रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023-24 के दौरान गुजरात के केवल छह पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को भाजपा को छोड़कर देश के सभी प्रमुख राष्ट्रीय दलों से भी अधिक चंदा प्राप्त हुआ। हैरानी की बात यह है कि इन दलों ने चुनावों में महज एक या दो सीटों पर ही अपने उम्मीदवार उतारे थे। चावड़ा ने इसे सुनियोजित वित्तीय अनियमितता करार देते हुए घोटाले का "मोदी मॉडल" बताया।
"ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा" के दावों पर कसा तंज
कांग्रेस नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भ्रष्टाचार विरोधी नारों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह वही व्यवस्था है जहां पर्दे के पीछे घोटाले गढ़े जाते हैं। चावड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ दावा किया जाता है कि "ना खाऊंगा और ना किसी को खाने दूंगा", जबकि जमीनी हकीकत यह है कि इन खातों में करोड़ों रुपये से कम का लेनदेन ही नहीं दिखता।
फर्जी पते और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए खातों के दुरुपयोग का आरोप
अमित चावड़ा ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चंदा पाने वाले कई राजनीतिक दल अपने पंजीकृत पतों, घरों या दफ्तरों पर मौजूद ही नहीं हैं। जमीन पर अस्तित्व न होने के बावजूद इन पार्टियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन दिखाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन तथाकथित दलों का चुनावी या संगठनात्मक खर्च कुछ लाख रुपये तक सीमित रहता है, जबकि उनकी आमदनी करोड़ों में दर्ज है। चावड़ा ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े लोग इन अनाम राजनीतिक दलों के बैंक खातों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और काले धन को सफेद करने के लिए कर रहे हैं, जिसकी एसआईटी द्वारा त्वरित जांच होनी चाहिए।


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