बिहार में बाढ़ का विकराल रूप, लाखों लोग प्रभावित; जानिए कहां बिगड़े हालात
पटना। बिहार में प्रमुख नदियों के उफान पर आने से बाढ़ की स्थिति विकराल हो गई है। गंगा, गंडक, कोसी, पुनपुन, सोन, दरधा और बागमती जैसी नदियों के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण पटना, भोजपुर, बक्सर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, खगड़िया, मुंगेर और भागलपुर समेत एक दर्जन से अधिक जिलों के निचले इलाके जलमग्न हो चुके हैं। राज्य के 70 से अधिक प्रखंडों की 20 लाख से ज्यादा आबादी बाढ़ की चपेट में है, जबकि पानी में डूबने से 20 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हालात की समीक्षा के लिए लगातार प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और अधिकारियों को चौबीसों घंटे निगरानी व राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए हैं।
पटना में नदियों का रौद्र रूप, सड़कों पर अंतिम संस्कार को मजबूर लोग
राजधानी पटना में गंगा, पुनपुन, दरधा और महत्माईन नदियों में आए उफान से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो वर्ष 2016 (50.52 मीटर) के बाद की सबसे गंभीर स्थिति है। दीघा, एलसीटी, कलेक्ट्रेट, गांधी घाट और रानीघाट पूरी तरह डूब चुके हैं। दीघा, बांस और गुलबी घाट स्थित मुक्तिधामों में पानी भर जाने से परिजनों को सड़कों के किनारे शवों का दाह संस्कार करना पड़ रहा है। कंगनघाट एप्रोच रोड और गुरुद्वारा परिसर जलमग्न हैं, वहीं पटना सिटी के 10 से अधिक मोहल्लों में पानी घुसने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। पुनपुन नदी के किनारे बसे 17 से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है।
जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट: पटना में राहत के संकेत, सुल्तानगंज में खतरा
जल संसाधन विभाग के अनुसार, गांधीघाट गेज स्थल पर गंगा 6 सितंबर को उच्चतम बाढ़ स्तर (HFL) 50.52 मीटर को पार कर 50.58 मीटर तक पहुंची थी, जो 7 सितंबर सुबह घटकर 50.40 मीटर दर्ज की गई। विभाग का अनुमान है कि गांधीघाट पर जलस्तर में गिरावट जारी रहेगी। हाथीदह में भी जलस्तर 43.52 मीटर से घटकर 43.50 मीटर पर आ गया है। हालांकि, डाउनस्ट्रीम में भागलपुर के सुल्तानगंज में संकट गहरा रहा है; वहां गंगा का जलस्तर 36.72 मीटर दर्ज हुआ, जो HFL (36.75 मीटर) से मात्र तीन सेंटीमीटर नीचे है और एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री पहुंचे वैशाली और सारण, मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख का मुआवजा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने वैशाली और सारण जिलों का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों का जमीनी जायजा लिया। हाजीपुर में पुराने टोल प्लाजा के पास संचालित राहत शिविर का औचक निरीक्षण करते हुए उन्होंने कम्युनिटी किचन के भोजन और सुविधाओं की गुणवत्ता परखी। मुख्यमंत्री ने डूबने से जान गंवाने वाले मृतकों के आश्रितों को 4-4 लाख रुपये के अनुग्रह अनुदान के चेक सौंपे और विस्थापितों को राहत किट बांटी। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए कि राहत सामग्री और जरूरी सुविधाओं में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सारण में पांच तटबंध टूटे, सवा लाख लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट
सारण जिले में बाढ़ का प्रकोप चरम पर है। पिछले 48 से 60 घंटों में पांच से अधिक तटबंध टूट चुके हैं, जबकि 20 जगहों पर गंभीर रिसाव जारी है। दरियापुर में महीं नदी का तटबंध 10 मीटर टूटने से 50 गांवों में बाढ़ का पानी फैलने की आशंका है, वहीं मांझी में दाहा नदी का बांध टूटने से सैकड़ों घरों में पानी घुस गया और करीब 300 बीघा फसल बर्बाद हो गई। जिले की 2.33 लाख से अधिक आबादी प्रभावित है, जिसमें से 1,20,060 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत कार्य के लिए 155 नावें, छह बोट एंबुलेंस, एनडीआरएफ की एक और एसडीआरएफ की छह टीमें तैनात की गई हैं।
बेगूसराय की 25 पंचायतों में जलप्रलय, नाव ही एकमात्र सहारा
बेगूसराय के पांच प्रखंडों की 25 पंचायतों और नगर निगम के चार वार्डों में बाढ़ का पानी घुस चुका है। सीहमा गांव में घरों में कमर तक पानी भर जाने से लोग पलायन कर रहे हैं। ग्रामीण सड़कों पर तिरपाल डालकर और ईंटों पर चौकी रखकर भोजन पकाने को विवश हैं। जिले में दो लाख से अधिक लोग भोजन, पेयजल और शौचालय के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं और आवागमन का एकमात्र साधन नाव ही बची है।
मुंगेर में 3 लाख लोग प्रभावित, केंद्रीय मंत्री ने की समीक्षा
मुख्यमंत्री के गृह जिले मुंगेर में गंगा के बढ़ते जलस्तर से 37 पंचायतों के करीब 300 गांव प्रभावित हैं, जिससे 3.05 लाख की आबादी संकट में है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने नेपाल और जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा को जलस्तर वृद्धि का कारण बताया। विस्थापितों के लिए 27 सामुदायिक रसोई शुरू की गई हैं और सुदूर इलाकों तक दवाएं पहुंचाने के लिए बोट एंबुलेंस की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नुकसान के आकलन के बाद केंद्र सरकार बिहार को हरसंभव सहायता देगी।


व्यापार से स्वच्छ ऊर्जा तक भारत-जर्मनी की बढ़ेगी साझेदारी, PM मोदी ने की बात
शुद्ध आहार–मिलावट पर वार अभियान