पेरिस| पेरिस के प्रमुख स्मारक पर हिंदू धार्मिक प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को ड्यूटी से हटाए जाने के आरोपों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस पूरे मामले पर बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि किसी को भी प्रवेश से नहीं रोका गया था और यह दौरा प्रबंधन के साथ समन्वय करके आयोजित किया गया था। फिर भी, किसी भी असुविधा के लिए संगठन ने खेद व्यक्त किया है। दूसरी ओर, स्थानीय अधिकारियों और प्रशासन ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।

बड़े प्रतिनिधिमंडल की वजह से खास व्यवस्था

संगठन के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल में सदस्यों की संख्या अधिक होने के कारण यह दौरा स्मारक के शुरुआती घंटों में निर्धारित किया गया था, ताकि आम पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित न हो। संस्था का कहना है कि उनकी जानकारी के मुताबिक किसी को भी वहां जाने से रोका नहीं गया था। इसके बावजूद, यदि किसी को किसी प्रकार की असुविधा हुई है तो उसके लिए उन्होंने दिल से माफी मांगी है।

ड्यूटी से हटाए जाने के आरोपों से उपजा विवाद

पेरिस में शनिवार को करीब 100 लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान आरोप लगा कि कुछ महिला कर्मियों को उनके कार्यस्थल से हटाकर पुरुष कर्मियों को तैनात किया गया था। इस घटना के विरोध में कर्मचारियों ने बैठक की, जिससे स्मारक खुलने के समय में देरी हुई और नोटिस जारी करना पड़ा। कर्मचारी यूनियन ने इसे लेकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

मंदिर उद्घाटन समारोह से जुड़ा था दौरा

यह प्रतिनिधिमंडल फ्रांस में एक नए हिंदू मंदिर के उद्घाटन कार्यक्रमों में भाग लेने आया था। उद्घाटन समारोह के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली जुड़कर दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों और मानवीय मूल्यों पर अपने विचार रखे थे।

प्रबंधन की प्रतिक्रिया और जांच के आदेश

स्मारक की संचालक कंपनी सेटे ने माना कि महिला कर्मचारियों से जुड़ी शर्तें स्वीकार नहीं की जानी चाहिए थीं। प्रबंधन द्वारा खेद जताए जाने के बावजूद कर्मचारियों का कहना है कि विस्तृत जांच जरूरी है। पेरिस के मेयर इमैनुएल ग्रेगोयर ने भी इस पूरे घटनाक्रम के तथ्यों को सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच कराने के आदेश जारी किए हैं।

आपसी सम्मान और सेवा के मूल्यों पर जोर

जारी बयान में संस्था ने स्पष्ट किया कि वे सभी उठाई गई चिंताओं का सम्मान करते हैं। उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य हमेशा आपसी सम्मान, सद्भाव और जनसेवा के सार्वभौमिक मूल्यों को बढ़ावा देना है।