कम उम्र में कप्तानी, रिकॉर्ड्स की झड़ी; जानें शुभमन गिल के स्टार बनने की कहानी
भारतीय क्रिकेट टीम के प्रमुख स्तंभ शुभमन गिल अपनी लाजवाब तकनीक, सटीक टाइमिंग और संयमित बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए कई यादगार पारियां खेली हैं। 8 सितंबर 1999 को पंजाब के फाजिल्का में जन्मे गिल का बचपन से ही क्रिकेट के प्रति गहरा लगाव था और वे अपनी उम्र से बड़े खिलाड़ियों के साथ अभ्यास किया करते थे।
घरेलू क्रिकेट और अंडर-19 विश्व कप से मिली पहचान
वर्ष 2014 में पंजाब के अंतर-जिला अंडर-16 टूर्नामेंट में गिल ने 351 रनों की विशाल पारी खेली और साथी खिलाड़ी के साथ 587 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी करके सबको चौंका दिया। इसके बाद विजय मर्चेंट ट्रॉफी में नाबाद दोहरा शतक और 2017 में रणजी डेब्यू मैच में ही शतक जड़कर उन्होंने अपनी प्रतिभा साबित की। वर्ष 2018 के अंडर-19 विश्व कप में भारतीय टीम के उपकप्तान के रूप में 124 की औसत से 372 रन बनाकर वे 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' बने, जिसमें पाकिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में खेली गई 102 रनों की नाबाद पारी बेहद खास थी।
आईपीएल में एंट्री और वनडे में सबसे कम उम्र का दोहरा शतक
आईपीएल 2018 में कोलकाता की फ्रेंचाइजी ने उन्हें अपनी टीम में शामिल किया, जहाँ उन्होंने डेब्यू सीजन में ही खुद को साबित किया। वर्ष 2019 में वनडे और 2020 में टेस्ट डेब्यू करने के बाद, ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गाबा टेस्ट में उनकी 91 रनों की पारी ने भारत की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाई। मात्र 23 वर्ष की आयु में न्यूजीलैंड के खिलाफ 208 रनों की आतिशी पारी खेलकर वे वनडे इतिहास में दोहरा शतक जमाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बने।
गुजरात टाइटंस की कप्तानी से लेकर टीम इंडिया की कमान तक
आईपीएल 2022 में गुजरात की टीम से जुड़ने के बाद उन्हें फ्रेंचाइजी की कप्तानी सौंपी गई। उनके बेहतरीन नेतृत्व और खेल को देखते हुए टेस्ट और वनडे प्रारूपों में भी भारतीय टीम की कमान उन्हें सौंपी जा चुकी है। अब तक अंतरराष्ट्रीय करियर में गिल टेस्ट में 3,000 से अधिक रन, वनडे में 3,300 से अधिक रन और टी20 अंतरराष्ट्रीय में 850 से अधिक रन बना चुके हैं, जिसमें कई शानदार शतक और अर्धशतक शामिल हैं।
2027 वनडे विश्व कप में होगी सबसे बड़ी परीक्षा
शुभमन गिल के नेतृत्व और कप्तानी के लिए आगामी 2027 का वनडे विश्व कप सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। यदि भारतीय टीम उनकी कप्तानी में विश्व कप की ट्रॉफी उठाने में सफल रहती है, तो गिल, कपिल देव (1983) और महेंद्र सिंह धोनी (2011) के बाद भारत को वनडे विश्व कप दिलाने वाले तीसरे ऐतिहासिक कप्तान बन जाएंगे।


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