निकाय चुनाव से पहले BJP सख्त, कांग्रेस नरम! बागियों को लेकर दोनों दलों की रणनीति क्या?
जयपुर| भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के जयपुर दौरे के बाद बीजेपी ने बागी उम्मीदवारों पर कड़ा शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसके विपरीत, कांग्रेस फिलहाल समझाइश और मान-मनौव्वल की नीति अपना रही है। जहाँ भाजपा ने बागियों की सूची जारी कर उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया है, वहीं कांग्रेस की निकाय चुनाव अनुशासन समिति का कहना है कि अभी तक किसी अधिकृत प्रत्याशी से लिखित शिकायत नहीं मिली है। शिकायत प्राप्त होने पर ही अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे। सूत्रों की मानें तो राजधानी जयपुर में कांग्रेस के 100 से अधिक बागी मैदान में डटे हैं, लेकिन अभी तक किसी पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रदेशाध्यक्ष के निष्कासन वाले बयान पर उठ रहे सवाल
नामांकन वापसी के समय कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने चेतावनी दी थी कि चुनाव मैदान से न हटने वाले बागियों को 6 साल के लिए निष्कासित किया जाएगा। हालांकि, अब चुनाव प्रचार का पहला चरण समाप्त होने और मतदान की तिथि नज़दीक आने के बाद भी कोई बड़ी कार्रवाई न होने से पार्टी के अंदर ही असंतोष पनपने लगा है। विपक्षी दल की त्वरित कार्रवाई के बाद दोनों पार्टियों की चुनावी रणनीति की तुलना की जा रही है।
कांग्रेस का पक्ष: पहले मान-मनौव्वल, फिर अंतिम कदम
कांग्रेस प्रवक्ताओं का तर्क है कि पार्टी पहले अपने पुराने और निष्ठावान नेताओं को समझाने को प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश व जिला स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारी मैदान में उतरे बागियों को अधिकृत प्रत्याशियों के समर्थन में बैठाने का प्रयास कर रहे हैं। जिला इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि यदि समझाइश के बाद भी कोई प्रत्याशी के खिलाफ प्रचार या चुनाव लड़ना जारी रखता है, तब ही कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
कठोर कार्रवाई न करने के पीछे की राजनीतिक 'गणित'
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस की ढिलाई की असली वजह चुनाव परिणाम के बाद बनने वाले बोर्ड का समीकरण है। निकाय चुनावों में यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो जाती है। यदि कांग्रेस के बागी निर्दलीय के रूप में जीत दर्ज करते हैं, तो बोर्ड बनाने में उनका समर्थन काम आ सकता है। चुनाव से पहले उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित करने से पार्टी भविष्य के दरवाजे बंद नहीं करना चाहती, इसलिए फिलहाल कार्रवाई से ज्यादा ध्यान तालमेल बैठाने पर दिया जा रहा है।


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