रीवा: मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल के रीवा स्थित निवास का घेराव करने जा रहे यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए पुलिस को कड़ा रुख अपनाना पड़ा। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन (पानी की बौछार) का प्रयोग किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। यह विरोध प्रदर्शन यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घंगोरिया के नेतृत्व में आयोजित किया गया था।

संजय गांधी अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर कांग्रेस का हल्लाबोल

यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता रीवा के संजय गांधी अस्पताल में व्याप्त कथित अनियमितताओं और चिकित्सकीय लापरवाही के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं। इससे पूर्व रविवार देर रात पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी सिरमौर चौराहे पर चल रहे कांग्रेस के धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए थे। उन्होंने वहां अनशन पर बैठे पीड़िता कल्पना मिश्रा के पिता से मुलाकात कर सांत्वना दी और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।

स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे की मांग और गंभीर आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि संजय गांधी अस्पताल का निर्माण क्षेत्र की जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं देने के लिए किया गया था, लेकिन वर्तमान में इसकी स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि छिंदवाड़ा में कफ सिरप से बच्चों की दुखद मृत्यु और बालाघाट में हुई मासूमों की मौत स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने कहा कि इन तमाम घटनाओं और कल्पना मिश्रा मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री को तत्काल अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

जानिए क्या है पूरा मामला और अब तक क्या हुई कार्रवाई?

पूरा विवाद संजय गांधी अस्पताल रीवा में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात शिशु की मौत के बाद गहराया है। पीड़िता के परिजन दोषियों पर सख्त कार्रवाई और पूरे मामले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग को लेकर लगातार धरने पर बैठे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अब तक दो नर्सिंग ऑफिसर साधना वर्मा व सीमा मुजालदे, और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर निधि पांडेय व डॉक्टर सोनल अग्रवाल को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा अस्पताल के अधीक्षक राहुल मिश्रा को भी उनके पद से हटा दिया गया है।