MMA फाइटर बनाम चिंपैंजी! 11 सितंबर की फाइट का दावा, विशेषज्ञों ने दी गंभीर चेतावनी
लॉस एंजिल्स। सोशल मीडिया की दुनिया इन दिनों एक बेहद अजीबोगरीब और हैरान कर देने वाले मुकाबले की चर्चा से गरमाई हुई है। एक तरफ मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए) फाइटर हैं, तो दूसरी तरफ कोई इंसानी प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि एक वयस्क चिंपैंजी है। अमेरिकी अमेचर एमएमए फाइटर कोल जॉनसन से जुड़ी इस वायरल कहानी ने इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोरी हैं, हालांकि इसकी प्रामाणिकता पर अभी भी संशय बना हुआ है।
मजाक से शुरू हुआ था विवाद
इस पूरे मामले की शुरुआत 30 अगस्त को तब हुई जब कोल जॉनसन ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि वह एक चिंपैंजी को वन-ऑन-वन फाइट में आसानी से हरा सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह शुरुआती वीडियो पूरी तरह एक मजाक के तौर पर बनाया गया था। लेकिन वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला नियंत्रण से बाहर हो गया और कथित तौर पर इस अजीब मुकाबले के लिए भारी-भरकम पैसों के ऑफर्स मिलने लगे। उद्यमी ब्रेंडन रूह के साथ बातचीत में जॉनसन ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह मजाक इस हद तक आगे बढ़ जाएगा।
भारी-भरकम रकम के ऑफर का दावा
फाइटर कोल जॉनसन, जिन्होंने अपने करियर में अब तक केवल एक ही अमेचर एमएमए मुकाबला लड़ा है, ने दावा किया कि उन्हें इस मुकाबले के लिए पांच लाख डॉलर यानी करीब 4.7 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी। उन्हें किसी अज्ञात देश में जाकर फाइट करने का प्रस्ताव मिला था। जॉनसन के अनुसार, उन्होंने उस प्रस्ताव को इसलिए ठुकरा दिया क्योंकि उन्हें ऑफर देने वाले व्यक्ति की नीयत पर संदेह था। इसके बाद उन्होंने एक अन्य समूह द्वारा और भी बड़ी रकम का प्रस्ताव मिलने का दावा किया है, हालांकि उस नई राशि का खुलासा सार्वजनिक रूप से नहीं किया गया है।
क्या इंसान और चिंपैंजी का मुकाबला संभव है?
इस वायरल चर्चा के बीच विशेषज्ञों ने सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, समान आकार के इंसान की तुलना में चिंपैंजी की मांसपेशियां काफी अधिक ताकत पैदा करती हैं। प्राइमेटोलॉजिस्ट किम्बर्ली हॉकिंग्स के शोध में यह बात सामने आई है कि चिंपैंजी के शक्तिशाली जबड़े, बड़े कैनाइन दांत, मजबूत हाथ और उनका आक्रामक स्वभाव किसी भी इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसके अलावा, चिंपैंजी किसी खेल के नियमों या 'टैप आउट' जैसी शर्तों को नहीं समझते हैं।
क्या यह मुकाबला वाकई होगा?
फिलहाल इस बात की कोई आधिकारिक या स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि 11 सितंबर को तय बताई जा रही यह फाइट वास्तव में आयोजित होगी या नहीं। कई प्रमोशनल वेबसाइट्स और काउंटडाउन के जरिए इस चर्चा को हवा जरूर मिली है, लेकिन मनोरंजन के लिए किसी जंगली जानवर को ऐसी स्थिति में धकेलना गंभीर पशु कल्याण और कानूनी सवाल भी खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पांच लाख डॉलर के दावों के बीच इस कहानी कोरी अफवाह और वायरल ट्रेंड से ज्यादा कुछ नहीं माना जाना चाहिए, जहां सबसे बड़ा दांव धन का नहीं बल्कि सुरक्षा का है।


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