इंदौर: मध्यप्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-3 से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक गोलू शुक्ला ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र भेजकर हालिया प्रदर्शित फिल्म 'हनुमान अंश' को राज्य में कर-मुक्त (टैक्स फ्री) करने का अनुरोध किया है। विधायक ने पत्र में उल्लेख किया है कि यह सिनेमा सनातन संस्कृति और महाबली हनुमान जी के महिमामय स्वरूप पर केंद्रित है। इसे समाज के प्रत्येक वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर आम जनमानस तक सहजता से पहुँचाने के लिए टैक्स फ्री किया जाना आवश्यक है।

कैंची धाम के नीम करोली बाबा पर आधारित है फिल्म, टिकट दरों पर जताई चिंता

विधायक शुक्ला के अनुसार यह फिल्म प्रसिद्ध कैंची धाम वाले संत नीम करोली बाबा के दिव्य जीवन और उनके आध्यात्मिक दर्शन से प्रेरित है। दर्शकों के बीच फिल्म की बढ़ती लोकप्रियता के कारण थिएटर संचालकों द्वारा टिकटों के मूल्य में वृद्धि किए जाने पर उन्होंने चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि टिकट की दरें बढ़ने से आम नागरिक इस सांस्कृतिक व धार्मिक फिल्म को देखने से वंचित रह रहे हैं। इसके साथ ही विधायक ने अपने क्षेत्र की जनता के लिए गुरुवार को इस फिल्म का विशेष शो आयोजित करने का भी निर्णय लिया है।

बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास: 10 लाख से शुरू होकर 96 करोड़ के पार पहुँची कमाई

'हनुमान अंश' ने व्यावसायिक सफलता का एक नया अध्याय लिखा है। प्रदर्शन के प्रथम दिन महज 10 लाख रुपये का व्यवसाय करने वाली इस फिल्म ने दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया (वर्ड-ऑफ-माउथ) के बल पर भारत में 81.41 करोड़ रुपये नेट तथा 96.03 करोड़ रुपये ग्रॉस का शानदार कलेक्शन कर लिया है।

ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के रवैये पर निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी का छलका दर्द

फिल्म की इस अभूतपूर्व सफलता के बीच इसके लेखक, निर्देशक और निर्माता डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने एक साक्षात्कार में अपने शुरुआती दौर के संघर्षों को याद किया। उन्होंने बताया कि जब वे एक प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म के समक्ष महाराज जी (नीम करोली बाबा) की जीवन गाथा सुना रहे थे, तो भावुक होकर उनकी आँखों में आँसू आ गए थे। इसके बावजूद अधिकारियों ने न केवल उनकी कहानी को खारिज किया, बल्कि उनके प्रति अनुचित भाषा का प्रयोग कर भारतीय संस्कृति से जुड़ी कथा का अपमान भी किया।

संस्कृति विरोधी नैरेटिव तोड़ने का संकल्प, सीक्वल की तैयारी शुरू

निर्देशक विशाल ने कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म के उस अपमानजनक व्यवहार ने उनके संकल्प को और मजबूत किया कि अपनी जड़ों व संस्कृति से जुड़ी कहानियों को बड़े पर्दे पर लाना कितना अनिवार्य है। भारतीय दर्शकों से मिले अपार प्रेम और सफलता ने उस भ्रामक नैरेटिव को ध्वस्त कर दिया है। फिल्म की इस ऐतिहासिक सफलता को देखते हुए निर्माताओं ने अब इसके अगले भाग (सीक्वल) की योजना पर काम शुरू कर दिया है।