मुंबई। वरिष्ठ न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी ने बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के 50वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। राजभवन में आयोजित गरिमामय समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने उन्हें शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार सहित राज्य मंत्रिमंडल के वरिष्ठ सदस्य और न्यायिक सेवा से जुड़े गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

तीन दशक से अधिक का लंबा न्यायिक अनुभव

जस्टिस महेश चंद्र त्रिपाठी ने वर्ष 1990 में लखनऊ विश्वविद्यालय से विधि (Law) की डिग्री प्राप्त की थी। 11 जनवरी 1992 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराने के पश्चात उन्होंने मुख्य रूप से सिविल मामलों में अपनी वकालत शुरू की। अक्टूबर 2007 से उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता (Additional Chief Standing Counsel) के रूप में अपनी सेवाएं दीं।

इलाहाबाद हाई कोर्ट से बॉम्बे हाई कोर्ट का सफर

जस्टिस त्रिपाठी को 27 सितंबर 2013 को इलाहाबाद हाई कोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया था, जिसके बाद 10 अप्रैल 2015 को वे स्थायी न्यायाधीश बने। वे इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीशों की सूची में शामिल रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बॉम्बे हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश पद पर उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी थी। वे 20 जून 2028 को सेवानिवृत्त होंगे।

बॉम्बे हाई कोर्ट में जजों की वर्तमान स्थिति

जस्टिस त्रिपाठी के पदभार ग्रहण करते समय बॉम्बे हाई कोर्ट में कार्यरत न्यायाधीशों की कुल संख्या 74 हो गई है, जबकि यहां स्वीकृत पदों की संख्या 94 है। देश के सबसे प्रमुख उच्च न्यायालयों में शामिल बॉम्बे हाई कोर्ट का क्षेत्राधिकार महाराष्ट्र, गोवा के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव तक विस्तृत है।