मुंबई के झोपड़ीधारकों को मालिकाना हक दिलाने के उद्देश्य से शुरू की गई 'एसआरए अभय योजना' (SRA Abhay Yojana) अब विवादों के घेरे में आ गई है। शिवसेना के समूह नेता और पार्षद अमेय घोले ने मुंबई महानगरपालिका (BMC) की स्थायी समिति की बैठक में गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि योजना के तहत आम झोपड़ीधारकों की पात्रता तय करने के एवज में 5 से 10 लाख रुपये तक की रिश्वत मांगी जा रही है, जिससे गरीब परिवारों की फाइलें महीनों से दफ्तरों में अटकी पड़ी हैं।

अकेले 'एफ उत्तर वॉर्ड' में 350 से अधिक फाइलें लंबित

बैठक में मुद्दा उठाते हुए अमेय घोले ने स्पष्ट किया कि केवल मुंबई के एफ उत्तर वॉर्ड में ही 300 से 350 फाइलें लंबे समय से मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग मांगी गई रकम देने में असमर्थ हैं, उनकी फाइलें जानबूझकर आगे नहीं बढ़ाई जा रही हैं। घोले ने इस पूरे मामले में संलिप्त महानगरपालिका अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

तकनीकी अड़चनों को दूर करने के लिए शुरू हुई थी योजना

मुंबई में बड़ी संख्या में लोग अपनी झोपड़ियों की खरीद-बिक्री करते हैं। पुराने कड़े नियमों के चलते नए खरीदारों का नाम पात्र सूची में जोड़ना संभव नहीं हो पाता था, जिससे हजारों गरीब परिवार पक्के मकान के अधिकार से वंचित हो रहे थे। इसी समस्या का निवारण करने और तकनीकी रुकावटों को समाप्त करने के लिए राज्य सरकार की ओर से लगभग दो वर्ष पूर्व 'SRA अभय योजना' का शुभारंभ किया गया था, जिसमें महानगरपालिका की भी अहम भूमिका निर्धारित की गई थी।

कार्रवाई न होने पर सभात्याग और सत्ता छोड़ने की चेतावनी

अमेय घोले ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि वे लंबे समय से इस भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन बीएमसी प्रशासन लगातार ढुलमुल रवैया अपनाए हुए है। प्रशासन की इसी बेरुखी के विरोध में उन्होंने स्थायी समिति की बैठक का बहिष्कार करते हुए सभात्याग किया। इसके साथ ही उन्होंने गठबंधन सहयोगी भाजपा को चेतावनी दी कि यदि भ्रष्ट अधिकारियों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सत्ता से बाहर होने से भी परहेज नहीं करेंगे।