बारिश ने बिगाड़ा बजट, अब सोना बना सहारा; जेवर के बदले लोन लेने वालों की बढ़ी संख्या
नई दिल्ली: कमजोर व अनियमित मानसून के साथ-साथ महंगाई के बढ़ते दबाव और दैनिक घरेलू खर्चों को पूरा करने के लिए भारतीय परिवार अब घरों में रखे सोने का सहारा ले रहे हैं। आपातकालीन परिस्थितियों में नकदी जुटाने के लिए लोग या तो पुराने गहने बेच रहे हैं अथवा उन्हें गिरवी रखकर गोल्ड लोन हासिल कर रहे हैं। इसके अलावा, नए आभूषणों की खरीदारी के लिए भी पुराने सोने को एक्सचेंज करने का चलन तेजी से बढ़ा है। ऐसे में सोना अब केवल निवेश या सजने-संवरने का साधन नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में वित्तीय राहत का एक महत्वपूर्ण जरिया बन चुका है।
पुराने सोने के बदले नई ज्वेलरी खरीदने का बढ़ा रुझान
सोने की रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद पूरा पुराना सोना बाजार में स्क्रैप (कबाड़) के रूप में नहीं आ रहा है। इसके बजाय, ग्राहक पुराने आभूषणों को देकर नए डिजाइन की ज्वेलरी खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस एक्सचेंज ट्रेंड के कारण सर्राफा बाजार में पुराने सोने की खपत नई खरीदारी में ही हो रही है।
वर्ष 2026 में 103 टन तक पहुंच सकती है गोल्ड स्क्रैप सप्लाई
कमोडिटी रिसर्च फर्म 'मेटल्स फोकस' (Metals Focus) के अनुमानों के अनुसार, वर्ष 2026 में भारत में गोल्ड स्क्रैप की कुल आपूर्ति लगभग 11 प्रतिशत बढ़कर 103 टन तक पहुंचने की संभावना है। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा करीब 93 टन रहा था। पिछले दो वर्षों की लगातार गिरावट के बाद स्क्रैप सप्लाई में यह पहली सालाना बढ़ोतरी होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर मानसून के कारण ग्रामीण आय और कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है, जिससे लोग अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए सोना बेचने का विकल्प चुन रहे हैं।
बैंकों का कुल गोल्ड लोन 5.52 लाख करोड़ रुपये के पार
आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 के अंत तक भारतीय बैंकों का कुल गोल्ड लोन बकाया बढ़कर लगभग 5.52 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।
सोना बेचने के बजाय गिरवी रखकर कर्ज लेने को तरजीह
गोल्ड लोन की आसान उपलब्धता ने सीधे तौर पर सोने की बिक्री को प्रभावित किया है। वित्तीय तंगी के समय लोग संपत्ति को पूरी तरह बेचने के बजाय उसे सुरक्षित रखकर कर्ज लेना ज्यादा बेहतर मान रहे हैं। यही कारण है कि बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के गोल्ड लोन पोर्टफोलियो में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के आंकड़ों की तुलना करें तो जुलाई 2024 के अंत में बैंकों और एनबीएफसी का कुल गोल्ड लोन बकाया करीब 2.70 लाख करोड़ रुपये था, जो अब दोगुने से अधिक हो चुका है।


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