कोटा। राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा इन दिनों भीषण गर्मी और झुलसाने वाली लू की चपेट में है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से बेहाल हो गया है। शुक्रवार को शहर का अधिकतम तापमान 42.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसमें हालांकि पिछले दिनों के मुकाबले एक डिग्री की मामूली गिरावट देखी गई, लेकिन इसके बावजूद चिलचिलाती धूप और थपेड़े मारती गर्म हवाओं के कारण स्थानीय निवासियों को कोई राहत नहीं मिल सकी। रात के समय भी गर्मी का असर कम नहीं हो रहा है और न्यूनतम तापमान भी एक डिग्री गिरकर 28.6 डिग्री सेल्सियस पर टिका हुआ है, जिसके चलते मौसम विज्ञानियों और डॉक्टरों ने दोपहर के समय लोगों को बिना किसी जरूरी काम के घरों से बाहर न निकलने की हिदायत दी है।

रोहिणी नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश और नौतपा का प्रचंड आगाज

मौसम के इस तल्ख तेवर के बीच आगामी पच्चीस मई से लेकर दो जून तक नौतपा का दौर शुरू होने जा रहा है, जो गर्मी के प्रकोप को और अधिक बढ़ा सकता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, पच्चीस मई को दोपहर तीन बजकर सैंतीस मिनट पर सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे और आगामी आठ जून तक इसी स्थिति में रहेंगे, जिसके शुरुआती नौ दिनों को नौतपा के रूप में जाना जाता है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यता है कि रोहिणी नक्षत्र के स्वामी शीतलता के प्रतीक चंद्रमा हैं, लेकिन जब सूर्य इस नक्षत्र में आते हैं तो वे इसकी शीतलता को पूरी तरह सोख लेते हैं और इस अवधि में सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर गिरने के कारण तापमान अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाता है।

सत्ताईस वर्षों बाद नौतपा में दो मंगलवार का दुर्लभ और संवेदनशील संयोग

इस बार का नौतपा कई मायनों में बेहद खास और ज्योतिषीय दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि पूरे सत्ताईस साल बाद इस अवधि के दौरान दो मंगलवार पड़ रहे हैं। अग्नि तत्व के कारक माने जाने वाले मंगल ग्रह की इस उपस्थिति के कारण इस साल नौतपा के दौरान अत्यधिक गर्मी, भीषण लू, अचानक आगजनी की दुर्घटनाएं और प्राकृतिक आपदाएं आने की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले वर्ष 1999 में नौतपा के दौरान दो मंगलवार पड़ने और ज्येष्ठ अधिक मास का ऐसा ही दुर्लभ संयोग देखा गया था, हालांकि इस बार रोहिणी का निवास समुद्र में होने के कारण भविष्य में समय पर और अच्छी बारिश होने के भी शुभ संकेत मिल रहे हैं जो कृषि क्षेत्र और फसलों के लिए संजीवनी साबित होंगे।

ग्रहों की चाल से बन रहा त्रिग्रही योग और नौतपा खंडित होने की संभावना

भीषण गर्मी के इस अनुमान के बीच कुछ ऐसे खगोलीय बदलाव भी हो रहे हैं जो आम जनता को चिलचिलाती धूप से थोड़ी राहत दे सकते हैं। नौतपा की इस अवधि के दौरान मिथुन राशि में देवगुरु बृहस्पति और शुक्र की युति रहने वाली है, जिसके साथ ही आगामी उनतीस मई को बुध ग्रह भी इसी राशि में प्रवेश कर जाएंगे। इस तरह मिथुन राशि में बनने वाले इस विशेष त्रिग्रही योग के प्रभाव से मैदानी इलाकों में तेज तपिश के बीच अचानक धूल भरी आंधियां चलने और गरज-चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी होने की प्रबल संभावना बन रही है, जिससे इस बार नौतपा के खंडित होने और मौसम में अचानक बदलाव आने के आसार हैं।

नौतपा का वैज्ञानिक आधार और उत्तम स्वास्थ्य के लिए जरूरी सावधानियां

अगर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो नौतपा के समय सूर्य पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध के सबसे नजदीक आ जाता है, जिससे उसकी किरणें भारत समेत पूरे उपमहाद्वीप पर लंबवत यानी बिल्कुल सीधी पड़ती हैं और यही वजह है कि इस दौरान ग्रीष्म ऋतु अपने चरम पर होती है। इस कठिन मौसम में आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शरीर को सुरक्षित रखने के लिए बेल का शरबत, दही, सत्तू और फलों के रस जैसे तरल पदार्थों के अधिक सेवन की सलाह दी है। इसके साथ ही धार्मिक रूप से इस समय जल, पंखे और मौसमी फलों का दान करना बेहद शुभ माना गया है और शारीरिक शीतलता बनाए रखने के लिए योग विज्ञान में शीतली प्राणायाम व चंद्रासन जैसी क्रियाओं को जीवनशैली में शामिल करना सबसे उत्तम बताया गया है।