कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग, पेट्रोल-डीजल के दामों पर नजर
नई दिल्ली: कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की वैश्विक कीमतों में 22 जुलाई को अचानक भारी उछाल दर्ज किया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ-साथ भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी सीधा असर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड 2.76 प्रतिशत चढ़कर 93.54 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड में भी 2.83 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। इस तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार और मुद्रा बाजार पर तुरंत देखा गया, जहां प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई और सेंसेक्स करीब 700 अंक तक गिर गया।
मध्य पूर्व में तनाव से कच्चे तेल में उबाल
कच्चे तेल की कीमतों में आए इस अचानक उछाल की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष को माना जा रहा है। सैन्य कार्रवाइयों और जवाबी हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र में स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित हुई है। इस वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के चलते आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार चढ़ रहे हैं।
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर और आयात बिल में भारी वृद्धि
तेल की कीमतों में उछाल के कारण भारतीय मुद्रा रुपये पर दबाव बढ़ गया है और यह अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे टूटकर 96.36 के स्तर पर आ गया। भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जून तिमाही में भारत का कच्चा तेल आयात खर्च पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 60 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिससे सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ बढ़ा है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण देश में ईंधन की कीमतों में पहले ही कई बार बढ़ोतरी की जा चुकी है, जिससे विभिन्न शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का यह रुख आगे भी जारी रहता है, तो तेल विपणन कंपनियां ईंधन के खुदरा दामों में फिर से वृद्धि करने के लिए मजबूर हो सकती हैं।
आम जनता के बजट और मुद्रास्फीति पर पड़ेगा सीधा असर
ईंधन की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ेगा, जिससे दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे आम नागरिकों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा और देश में समग्र मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका भी गहरी हो जाएगी।


पंजाब कांग्रेस में हलचल तेज, बैठक टलने के बाद अचानक फिर बुलाई गई
सरकार से संवाद की पहल, सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखी शर्त