मंत्री जी पर कानूनी शिकंजा: पुलिसकर्मी से अभद्रता मामले में गौतम दक के खिलाफ केस दर्ज
जयपुर | राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर धमकाने, उनके साथ दुर्व्यवहार करने और गाली-गलौच करने के आरोप में मंत्री के खिलाफ देर रात मामला दर्ज कर लिया गया है। यह एफआईआर चित्तौड़गढ़ जिले के डूंगला थाना प्रभारी शैतान सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई है। पुलिस ने मंत्री के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने, अभद्र भाषा का प्रयोग करने और डराने-धमकाने के आरोपों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132, 351(2) और 352 के तहत केस दर्ज कर मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है।
पूछताछ के दौरान राजनीतिक धौंस और रिश्वत के झूठे आरोप
दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा विवाद 25 मई 2026 को शुरू हुआ जब डूंगला थाने में दर्ज एक पुराने मामले की तफ्तीश के सिलसिले में धनराज खारोल नामक व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। जांच के दौरान जब पुलिस ने धनराज से उसके बेटे मनोज खारोल और परिवार के अन्य सदस्यों को भी शामिल करने को कहा, तो धनराज ने साफ मना कर दिया। उसने पुलिस को अपनी राजनीतिक पहुंच की धौंस दिखाते हुए सहकारिता मंत्री गौतम दक से बात कराने की बात कही। इसके बाद पूर्व सरपंच चंद्रशेखर शर्मा ने भी पुलिसकर्मी लक्ष्मीनारायण को फोन कर कथित रूप से धमकाया कि यदि दोबारा धनराज को थाने बुलाया गया तो इसकी शिकायत सीधे मंत्री से की जाएगी। आरोप है कि इन लोगों ने कार्रवाई से बचने के लिए मंत्री से पुलिस द्वारा रिश्वत मांगे जाने की झूठी शिकायत भी कर दी।
सरेआम गाली-गलौच, अपमान और ट्रांसफर की धमकी
थानाधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में आरोप है कि उसी दिन दोपहर में सहकारिता मंत्री गौतम दक ने थाना प्रभारी शैतान सिंह को फोन करके थाने के बाहर बुलाया। वहाँ मंत्री ने मामले से जुड़े पुलिसकर्मियों लक्ष्मीनारायण और विष्णु कुमार को भी तलब किया। आरोप है कि जैसे ही दोनों पुलिसकर्मी वहाँ पहुँचे, मंत्री ने बिना उनका पक्ष सुने या मामले की सच्चाई जाने, आम जनता के सामने उनके साथ बेहद अभद्र व्यवहार किया और मां-बहन की गालियां दीं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मंत्री ने पुलिसकर्मियों पर हाथ उठाने का प्रयास किया, उन्हें नौकरी से हटवाने तथा ट्रांसफर कराने की धमकियां दीं, जिससे पूरी टीम गहरे तनाव और भय में आ गई। इस बर्ताव से न केवल सरकारी काम में रुकावट आई, बल्कि पुलिस महकमे की छवि को भी ठेस पहुँची।
अवसाद के बाद दर्ज हुआ केस, मंत्री ने आरोपों को नकारा
थाना प्रभारी ने बताया कि इस अप्रत्याशित घटना के बाद वे गहरे मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) में चले गए थे। बाद में स्थिति सामान्य होने पर उन्होंने पूरे घटनाक्रम की लिखित रिपोर्ट अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सौंपी, जिसके बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर यह मामला दर्ज किया गया। दूसरी तरफ, इस पूरी घटना से जुड़ा एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। मामला तूल पकड़ने के बाद सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सफाई दी है। मंत्री का कहना है कि सोशल मीडिया पर चल रहे इस कथित ऑडियो से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उन पर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।


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