रायपुर। छत्तीसगढ़ की साय सरकार अब सेवानिवृत्त (रिटायर्ड) हो चुके दागी और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ एक बड़े और कड़े एक्शन की तैयारी में है। छत्तीसगढ़ लोक आयोग की महत्वपूर्ण सिफारिशों के बाद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए सूबे के सभी विभागों से उनका आधिकारिक अभिमत (फीडबैक) मांगा है। दरअसल, आयोग ने मौजूदा प्रशासनिक नियमों की खामियों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। वर्तमान व्यवस्था के मुताबिक, किसी भी अधिकारी की सेवानिवृत्ति के 4 साल बीत जाने के बाद उसके पुराने मामलों में विभागीय जांच (डीई) शुरू नहीं की जा सकती। इसी कानूनी लूपहोल (कमी) का फायदा उठाकर कई दागी अफसर अब तक कड़ी कार्रवाई से साफ बच निकलते रहे हैं।

जांच की सुस्त रफ्तार पर आयोग सख्त

लोक आयोग का मानना है कि कई संवेदनशील मामलों में जांच की प्रक्रिया जानबूझकर या प्रशासनिक सुस्ती के कारण लंबी खींच दी जाती है। जैसे ही सेवानिवृत्ति के बाद 4 वर्ष की डेडलाइन पूरी होती है, वह केस स्वतः ही समाप्त मान लिया जाता है। इसके चलते भ्रष्टाचार और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं में लिप्त रहे अधिकारियों पर नकेल नहीं कसी जा पाती। इस विसंगति को दूर करने के लिए आयोग ने समय-सीमा के इस नियम को बदलकर महज छह महीने करने का बड़ा सुझाव दिया है, ताकि भ्रष्टाचार के मामलों का निपटारा फाइलों में दबे बिना फौरन हो सके।

दागी अफसरों की पेंशन पर लगेगी रोक

सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के सभी विभागाध्यक्षों, जिला कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों (SPs) को एक नया सर्कुलर जारी किया है। इसके तहत शासकीय धन के गबन, रिश्वतखोरी और गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में तत्काल प्रभाव से कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। यह पूरी कार्रवाई ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976’ के नियम 8, 9 और 65 के कड़े प्रावधानों के अंतर्गत अमल में लाई जाएगी।

राजभवन की हरी झंडी, पाई-पाई की होगी रिकवरी

नए दिशानिर्देशों के मुताबिक, जांच में दोषी पाए जाने वाले पूर्व अधिकारियों की पेंशन रोकने या उसे स्थाई रूप से वापस लेने के लिए सीधे राज्यपाल (राजभवन) से मंजूरी ली जाएगी। इसके साथ ही, भ्रष्ट आचरण से सरकारी खजाने को पहुंचाए गए नुकसान की शत-प्रतिशत (100%) वित्तीय वसूली भी की जाएगी। आयोग ने यह भी साफ कर दिया है कि जिन संदिग्ध अधिकारियों की सेवानिवृत्ति में अब 6 महीने से कम का वक्त बचा है, उनके खिलाफ चल रही जांच को बिना किसी देरी के तत्काल पूरा करना अनिवार्य होगा।