जयपुर | राजस्थान में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और लू (हीटवेव) का सामना कर रहे नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। प्रदेश में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने शनिवार को राज्य के 30 जिलों में तेज अंधड़, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी (अलर्ट) जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक नए पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) के प्रभावी होने से 1 जून तक समूचे प्रदेश के वायुमंडल में यह बदलाव देखने को मिलेगा।

अंधड़ और ओलावृष्टि से लुढ़का पारा, मलसीसर में सर्वाधिक वर्षा

बीते 24 घंटों के दौरान उत्तर-पूर्वी राजस्थान के कई हिस्सों में अचानक तेज हवाओं के साथ पानी गिरा और ओले पड़े, जिससे पर्यावरण में ठंडक घुल गई और तापमान में भारी कमी आई। राजधानी जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, अलवर, भरतपुर, करौली, चूरू, हनुमानगढ़ और बीकानेर संभाग के कई इलाकों में घने बादल छाए रहे। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा 43 मिमी बारिश झुंझुनूं के मलसीसर में दर्ज की गई। इसके अलावा कोटपूतली, नीमराणा, पिलानी, खेतड़ी, चिड़ावा, पाटन और बानसूर में भी बादलों ने झमाझम राहत बरसाई।

70 किमी की रफ्तार से चलेंगी हवाएं, जैसलमेर अब भी सबसे गर्म

पूर्वानुमान के मुताबिक, शनिवार और रविवार को राजस्थान के ज्यादातर हिस्सों में 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी धूलभरी आंधी चलने की आशंका है। इसके साथ ही कई जिलों में आकाशीय बिजली चमकने और ओले गिरने की संभावना है, जिससे अगले दो-तीन दिनों में पारा 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक और गिर सकता है। हालांकि, पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में अभी भी सूरज के तेवर तीखे हैं। शुक्रवार को 45.6 डिग्री सेल्सियस के साथ जैसलमेर राज्य का सबसे तप्त इलाका रहा, जबकि बाड़मेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर और चूरू में भी तापमान 43 डिग्री से ऊपर बना रहा।

अल नीनो का साया, इस साल कमजोर रह सकता है मानसून

एक तरफ जहां प्री-मानसून की गतिविधियों और आंधी-पानी से आम जनता को फौरी राहत मिल रही है, वहीं दूसरी तरफ मौसम विभाग ने इस साल के मानसून को लेकर चिंताजनक आंकड़े साझा किए हैं। विभाग के संशोधित अनुमान के मुताबिक, इस वर्ष देश और प्रदेश में मानसूनी हवाएं उम्मीद से कमजोर रह सकती हैं। 'अल नीनो' प्रभाव के सक्रिय होने के कारण जून, जुलाई और अगस्त के मुख्य महीनों में वर्षा की गतिविधियों में कमी आ सकती है, जो आने वाले समय में किसानों और जल संकट के लिहाज से चिंता का विषय है।