जबलपुर: कोटा-नागदा रेलखंड के अंतर्गत कंवलपुरा और दरा रेलवे स्टेशनों के मध्य एक निर्माणाधीन अंडर ब्रिज के पास अचानक भारी मात्रा में मिट्टी खिसकने से दो रेल इंजीनियरों की मलबे में दबकर दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान रामगंजमंडी के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (पी-वे) संजय झा (47 वर्ष) और भवानी मंडी के जूनियर इंजीनियर (वर्क) प्रभात सिंह सोलंकी (29 वर्ष) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि प्रशासन द्वारा शनिवार 30 मई तक स्टील गर्डर हटाने की समय-सीमा तय की गई थी, जिसके चलते ईद की छुट्टी वाले दिन भी देर रात बिना पुख्ता सुरक्षा इंतजामों, हेलमेट और बैरिकेडिंग के काम कराया जा रहा था। जल्दबाजी के दौरान एक सीमेंट कंक्रीट का ब्लॉक तय जगह से आगे जाकर मिट्टी में धंस गया, जिसे हाइड्रोलिक मशीनों से दुरुस्त करने के बाद दोनों अधिकारी स्थिति की समीक्षा करने नीचे गड्ढे में उतरे थे, तभी ऊपर से भारी स्लीपर, गिट्टी और पत्थर उनके ऊपर आ गिरे। स्लीपर की चपेट में आने से प्रभात सिंह ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि संजय झा की अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। घटना के बाद रेलवे बोर्ड के मेंबर इंफ्रा विवेक कुमार गुप्ता और डीआरएम अनिल कालरा ने मौके का मुआयना किया। मामले की जांच के लिए सीनियर डीएसओ अजीत सिंह चौहान, सीनियर डीईएन (साउथ) एकता मिमरोट और सीनियर डीईई नीरज कुमार शर्मा की तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है।

जांच दल के स्वरूप पर खड़े हुए गंभीर सवाल

इस दर्दनाक हादसे की पड़ताल के लिए गठित की गई तीन सदस्यीय कमेटी की निष्पक्षता को लेकर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। इस जांच दल की जिम्मेदारी सीनियर डीईएन (साउथ) एकता मिमरोट की देखरेख में दी गई है, जबकि आंतरिक सूत्रों का दावा है कि घटना वाले दिन वह स्वयं निर्माण स्थल पर मौजूद थीं और हादसे से ठीक कुछ देर पहले ही वहां से रवाना हुई थीं। ऐसे में खुद उनकी निगरानी में जांच होने को लेकर महकमे में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। वह पिछले 12 सालों से इस क्षेत्र में विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं और भोपाल मंडल में कुछ समय रहने के बाद वापस यहां लौटी थीं। दूसरी तरफ, मोडक थाना पुलिस इस पूरे मामले की वैधानिक जांच कर रही है और पुलिस का कहना है कि जल्द ही केस दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप, शव को लेकर हुआ विवाद

हादसे के बाद दोनों मृतक इंजीनियरों के परिवारों ने रेल प्रशासन पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी और कार्यस्थल पर घोर लापरवाही बरतने के संगीन आरोप लगाए हैं। संजय झा के भाई रमन कुमार और प्रभात सिंह के भाई कैलाश सिंह ने रोष जताते हुए कहा कि रात के 1:30 बजे भी बिना किसी सुरक्षा कवच या बैरिकेडिंग के इतना खतरनाक काम कराया जा रहा था। इस बीच, संजय झा के पार्थिव शरीर को सौंपने के दौरान पुलिस और परिजनों के बीच असमंजस की स्थिति भी निर्मित हुई। भाई ने बताया कि पारिवारिक अनबन के कारण संजय की पत्नी पिछले 12 वर्षों से उनसे पृथक रह रही थीं, इसलिए शव भाइयों को मिलना चाहिए था, मगर पुलिस ने रात 11 बजे कोटा पहुंची उनकी पत्नी को शव सुपुर्द कर दिया। मृतक संजय झा मूल रूप से बिहार के चंपारण के रहने वाले थे।

कर्मचारी संगठनों का फूटा गुस्सा, रेल मंत्री से हस्तक्षेप की मांग

इस भीषण घटना के विरोध में रेलवे मजदूर संघ और एम्पलाइज यूनियन के बैनर तले रेल कर्मचारियों ने डीआरएम दफ्तर के बाहर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। यूनियनों ने समय-सीमा के दबाव में काम कराने का विरोध करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर डीआरएम को ज्ञापन सौंपा। उधर, डीआरयूसीसी के पूर्व सदस्य व सामाजिक कार्यकर्ता वीरेंद्र जैन ने सीधे रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजकर इस पूरे मामले की एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है। उन्होंने अपने पत्र में सचेत किया कि सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी लापरवाही से गर्डरों को क्षति पहुंच सकती थी, जिससे कोई बड़ी ट्रेन दुर्घटना भी घटित हो सकती थी। उन्होंने मानसून से पूर्व सुरक्षित तरीके से काम पूरा कराने और दोषियों को दंडित करने का आग्रह किया है।