यूनिवर्सिटी के फरमान पर उठे सवाल, अधिकारियों को राहत लेकिन मजदूरों पर बोझ
जबलपुर: नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय (वेटरनरी यूनिवर्सिटी) जबलपुर ने एक ऐसा प्रशासनिक फैसला सुनाया है, जिसने कैंपस में काम करने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के बीच गहरे असंतोष और गुस्से की लहर दौड़ा दी है। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट द्वारा जारी किए गए नए सर्कुलर के मुताबिक, संस्थान के अंतर्गत आने वाले तमाम उच्च कुशल, कुशल, अर्धकुशल और अकुशल श्रेणी के श्रमिकों को अब रविवार के अवकाश को छोड़कर महीने के सभी शनिवारों और अन्य राजपत्रित (सरकारी) छुट्टियों के दिनों में भी ड्यूटी पर आना अनिवार्य होगा। इस आदेश के लागू होते ही मजदूर संगठनों और कर्मचारियों ने इसे अपने अधिकारों का हनन और मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न बताया है। कर्मियों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शनिवार और अन्य सरकारी अवकाश के दिनों में यूनिवर्सिटी के तमाम बड़े अफसर और नियमित स्टाफ छुट्टी मनाएंगे, तो ऐसे में ये छोटे कर्मचारी दफ्तर आकर किसके निर्देशों पर कार्य करेंगे।
निगरानी के लिए बनाई गई सख्त व्यवस्था
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस नए नियम को कड़ाई से लागू करवाने के लिए एक विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैयार किया है। नई व्यवस्था के तहत कर्तव्य भवन में कार्यरत सभी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की रोज की हाजिरी लेने और उस पर पैनी नजर रखने का जिम्मा कुशल श्रमिक दिनेश टेकाम को दिया गया है। इसके साथ ही विश्वविद्यालय के सभी अलग-अलग विभागों के विभागाध्यक्षों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने यहां आने वाले श्रमिकों की अटेंडेंस रिपोर्ट सीधे रजिस्ट्रार (कुलसचिव) दफ्तर को प्रेषित करेंगे।
कुलपति से मिलकर आदेश रद्द कराने की तैयारी
विश्वविद्यालय प्रबंधन की इस नई व्यवस्था के खिलाफ कर्मचारी संघ ने पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है। संघ के नेताओं का आरोप है कि यह नियम पूरी तरह से भेदभावपूर्ण और तानाशाही रवैये को दर्शाता है, जिसे श्रमिक वर्ग कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों ने रणनीति बनाई है कि वे इस संवेदनशील मसले को लेकर जल्द ही विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर (कुलपति) से मुलाकात करेंगे और इस कर्मचारी विरोधी आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग करेंगे।


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