परिषदीय शिक्षकों और लोकतंत्र सेनानियों को कैशलेस इलाज की तैयारी, आज कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश के लोकतंत्र सेनानियों और शिक्षा जगत से जुड़े कर्मचारियों को एक बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है। राज्य के लोकतंत्र सेनानियों को अब 'मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना' के दायरे में लाते हुए पूरी तरह कैशलेस इलाज की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। इस महत्वपूर्ण योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में होने वाली कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव पेश किया जाएगा, जिसे हरी झंडी मिलने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
इसके साथ ही, इस कैबिनेट बैठक में किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए 'मक्का क्रय नीति' (मक्का खरीद नीति) पर भी मुहर लग सकती है। बैठक के एजेंडे में परिवहन, ऊर्जा, स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन, उच्च शिक्षा, नमामि गंगे और आबकारी विभाग समेत कई अहम महकमों के एक दर्जन से अधिक नीतिगत प्रस्ताव शामिल किए गए हैं, जिन पर अंतिम फैसला लिया जाना है।
शिक्षकों और शिक्षामित्रों के कैशलेस इलाज की तैयारी अंतिम दौर में
मुख्यमंत्री की पिछली घोषणा और कैबिनेट से पहले ही मिल चुकी सैद्धांतिक मंजूरी के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले परिषदीय, सरकारी अनुदान प्राप्त (एडेड) और स्ववित्तपोषित (सेल्फ फाइनेंस) स्कूलों के शिक्षकों, शिक्षामित्रों तथा अनुदेशकों को कैशलेस मेडिकल सुविधा देने की प्रशासनिक प्रक्रिया बेहद तेज हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की नोडल एजेंसी 'साचीज' ने इस पूरी व्यवस्था को डिजिटल रूप देने के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल तैयार कर लिया है। अब इस व्यवस्था को धरातल पर उतारने के लिए 4 जून को नोडल अफसरों की एक विशेष ट्रेनिंग (प्रशिक्षण) आयोजित की गई है।
सभी जिलों के शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी
बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने प्रदेश के सभी जिलों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को इस संबंध में एक आधिकारिक गाइडलाइन भेजी है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि:
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4 जून को दोपहर 12:00 बजे से 'साचीज' के तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन ट्रेनिंग दी जाएगी।
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इसका मुख्य उद्देश्य संबंधित शिक्षक वर्ग और अनुदेशकों को बिना किसी परेशानी के जल्द से जल्द कैशलेस इलाज का लाभ दिलाना है।
विभाग ने सभी बीएसए को अपने-अपने जिले का मुख्य नोडल अधिकारी नियुक्त करते हुए इस प्रशिक्षण सत्र में अनिवार्य रूप से शामिल होने का आदेश दिया है। इस बड़े फैसले के बाद प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर और मेरठ सहित पूरे सूबे के शिक्षक संगठनों में खुशी की लहर दौड़ गई है।


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