पुणे | महाराष्ट्र के पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले में जांच एजेंसियां लगातार चौंकाने वाले खुलासे कर रही हैं। अब तक बाईस लोगों की जान ले चुके इस दर्दनाक शराब कांड की कड़ियों को जोड़ते हुए पता चला है कि फुगेवाड़ी क्षेत्र में ही अवैध रूप से तैयार कच्ची शराब में जानलेवा केमिकल 'मेथनॉल' मिलाया जा रहा था। पुलिस और जांच दलों के मुताबिक, मुनाफा कमाने के चक्कर में आरोपियों ने अपने घर को ही इस जानलेवा धंधे का ठिकाना बना रखा था।

घर में तैयार हो रहा था मौत का सामान, जहरीला मेथनॉल मिलाने का खुलासा

जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी कर्नेलसिंह विरका, उसकी पत्नी इंदरजीत विरका और बेटे गुरुचरण उर्फ विक्की विरका ने मिलकर इस खौफनाक साजिश को अंजाम दिया। इन लोगों ने बाहर से मंगवाई गई कच्ची शराब की तीव्रता और मात्रा बढ़ाने के लिए अपने घर पर ही उसमें करीब दो सौ पंद्रह लीटर घातक मेथनॉल रसायन मिला दिया था। फॉरेंसिक और सीआईडी की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपियों ने चंद रुपयों के लालच और मामूली फायदे के लिए सैकड़ों लोगों की जिंदगी को जानबूझकर दांव पर लगा दिया, जिसके कारण कई परिवारों के चिराग बुझ गए।

सीन री-क्रिएशन के दौरान फूटा परिजनों का गुस्सा, पथराव की आई नौबत

मामले की गहराई से तफ्तीश करने और सबूत जुटाने के लिए जब सीआईडी की टीम आरोपियों को साथ लेकर फुगेवाड़ी स्थित घटनास्थल पर पहुंची, तो वहां मौजूद लोगों का धैर्य जवाब दे गया। मृतकों के रोते-बिलखते परिजन और स्थानीय नागरिक आरोपियों को देखते ही भड़क उठे और उनके खिलाफ उग्र नारेबाजी करने लगे। देखते ही देखते वहां का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, एक बुजुर्ग महिला हाथ में चप्पल लेकर आरोपियों को सबक सिखाने आगे बढ़ी, जबकि कुछ आक्रोशित युवाओं ने पास पड़े पत्थर और सीमेंट के टुकड़े उठाकर आरोपियों पर हमला करने की कोशिश की। हालांकि, मुस्तैद पुलिस बल और सीआईडी के आला अधिकारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए भीड़ को पीछे धकेला और आरोपियों को सुरक्षित निकाल लिया।

अवैध कारोबार पर सियासी घमासान, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

यह पूरा मामला तब प्रकाश में आया जब पिंपरी-चिंचवड़ के दापोडी और फुगेवाड़ी बस्तियों में अचानक कई लोगों की तबीयत बिगड़ने से संदिग्ध मौतें होने लगीं। स्थानीय निवासियों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि प्रशासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से बेची जा रही अवैध कच्ची शराब पीने की वजह से ही इतने बड़े पैमाने पर जनहानि हुई है। इस वीभत्स कांड के बाद अब राज्य में राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। विपक्ष और कई स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने अवैध शराब माफियाओं पर समय रहते नकेल न कसने को लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा किया है। फिलहाल मामले की व्यापक जांच जारी है और पुलिस इस रैकेट से जुड़े हर छोटे-बड़े पहलू की पड़ताल कर रही है।