पंजाब की राजनीति में नया बयान, कुलतार संधवां ने बेअदबी कानून पर रखी स्पष्ट राय
सुनाम। पंजाब विधानसभा के गरिमामयी पद पर आसीन स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन एक्ट और श्री अकाल तख्त साहिब को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण बयान दिया है। सुनाम में पूर्व मंत्री बाबू भगवान दास अरोड़ा की बरसी पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे संधवां ने साफ किया कि श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से सरकार को कोई सीधे निर्देश जारी नहीं किए गए हैं, बल्कि सिंह साहिब (जत्थेदार) की तरफ से कुछ बेहद खास और महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इन सुझावों पर पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ विचार करेगी।
सिख भावनाओं के अनुसार कानून में बदलाव के लिए सरकार तैयार
मीडिया से बातचीत के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट संकेत दिए कि यदि सिख समाज की धार्मिक भावनाओं और मर्यादा की रक्षा के लिए आवश्यकता पड़ी, तो सरकार कानून में जरूरी और उचित संशोधन (बदलाव) करने से बिल्कुल पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि जत्थेदार साहिब के सुझावों का पूरा सम्मान किया जाएगा।
'हम बहस करने नहीं, सिर्फ सिर झुकाने गए थे'
श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को सर्वोपरि बताते हुए कुलतार सिंह संधवां ने कहा, "श्री अकाल तख्त साहिब मीरी-पीरी के मालिक छठे गुरु, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी द्वारा स्थापित एक महान और पवित्र संस्था है। वहां जाने का सरकार या किसी भी माननीय विधायक का उद्देश्य कोई राजनीतिक विवाद खड़ा करना नहीं था, बल्कि उस सर्वोच्च स्थान के आगे नतमस्तक होना था।"
उन्होंने आगे कहा कि आमतौर पर विधायक हर जगह बहस करने और अपनी बात को ऊपर रखने में माहिर माने जाते हैं, लेकिन अकाल तख्त साहिब के सामने सभी ने केवल हाथ जोड़े और शीश नवाया। जत्थेदार साहिब ने जो भी वचन या आदेश कहे, उन्हें पूरे आदर और सत्कार के साथ स्वीकार किया गया है। गुरु साहिब के दर्शन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जब भी कोई मतभेद या दुविधा की स्थिति हो, तो साथ बैठकर संवाद करना ही सबसे सही रास्ता है।
विशेष सत्र बुलाने पर बोले संधवां — फैसला कैबिनेट के हाथ में, मैं तैयार हूं
जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि क्या जत्थेदार द्वारा दिए गए एक महीने के समय के भीतर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जाएगा? तो इस पर स्पीकर संधवां ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि विधानसभा का सत्र कब और किस तारीख को आयोजित करना है, इसका अंतिम निर्णय पूरी तरह से पंजाब सरकार और कैबिनेट के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि, विधानसभा के अध्यक्ष के तौर पर वह अपनी जिम्मेदारियों को निभाने और किसी भी समय सत्र की कार्यवाही का संचालन करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।


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