मच्छर हुए 'सुपर स्ट्रॉन्ग', बेअसर हुई पुरानी दवा; नगर निगम ने बदली रणनीति
रांची: राजधानी में मच्छरों का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है और वे अब इतने प्रतिरोधी हो गए हैं कि नगर निगम द्वारा वर्षों से इस्तेमाल की जा रही दवा का असर उन पर काफी कम हो गया है। स्थिति यह है कि फागिंग के धुएं से मच्छर कुछ समय के लिए सुस्त या बेहोश होकर गिरते तो हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद दोबारा उड़ने लगते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए नगर निगम अब मच्छर मारने वाले रसायन को पूरी तरह बदलने की तैयारी कर रहा है।
दवा के बेअसर होने और क्षमता घटने की मुख्य वजह
वर्तमान समय में थर्मल फागिंग के लिए डीजल में 1.23 प्रतिशत डेल्टा मेथरिन यूएलवी दवा मिलाकर छिड़काव किया जाता है। लंबे समय तक लगातार एक ही रसायन का उपयोग किए जाने के कारण मच्छरों ने इसके खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है। इसके परिणामस्वरूप यह दवा अब केवल लगभग आधा असर ही दिखा पा रही है और केवल 50 प्रतिशत मच्छरों को मारने में ही सक्षम रह गई है।
नई तकनीक और मालाथिआन आधारित दवा का इस्तेमाल
मलेरिया नियंत्रण के नए दिशानिर्देशों के तहत नगर निगम अब मालाथिआन आधारित नई दवा का इस्तेमाल शुरू करने जा रहा है। आने वाले सप्ताह से इस नए रसायन का छिड़काव शुरू करने की योजना बनाई गई है, जिससे 80 प्रतिशत से अधिक मच्छरों और उनके लार्वा को नष्ट करने में सफलता मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यह नया रसायन साफ और गंदे दोनों तरह के पानी में पनपने वाले लार्वा पर समान रूप से असरदार साबित होगा।
थर्मल और कोल्ड फागिंग की कार्यप्रणाली में अंतर
थर्मल फागिंग में डीजल के साथ रसायन मिलाकर मशीन के जरिए सफेद धुआं छोड़ा जाता है, जो हवा में फैलकर केवल वयस्क मच्छरों को प्रभावित करता है। इसके विपरीत कोल्ड फागिंग में पानी के साथ दो प्रतिशत डेल्टा मेथरिन मिलाकर महीन फुहारों के रूप में छिड़काव किया जाता है। यह फुहार सतहों पर जम जाती है और मच्छरों के लार्वा को जड़ से समाप्त करने में थर्मल फागिंग की तुलना में काफी अधिक प्रभावी मानी जाती है।
मच्छर नियंत्रण के लिए नागरिक जागरूकता भी जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि केवल फागिंग या दवाओं के छिड़काव से मच्छरों की समस्या पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सकता। इसके लिए आम जनता को भी सजग रहना होगा। जलजमाव को रोकने, आसपास स्वच्छता बनाए रखने और अपने घरों के आसपास ऐसे सभी स्रोतों को खत्म करने की जरूरत है जहाँ पानी इकट्ठा होता हो और लार्वा पनपने की संभावना बनी रहती हो।


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