14 लोगों की जान लेने वाले धमाके का चार साल बाद आया फैसला, दो दोषी करार
भागलपुर: व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11 ज्योति कुमारी कश्यप की अदालत ने तातारपुर थाना क्षेत्र के चर्चित काजवली चक बम ब्लास्ट मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। न्यायालय ने हबीबपुर के चमेली चक निवासी मोहम्मद आजाद और काजवली चक निवासी नवीन मंडल को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, इस मामले में साक्ष्यों के अभाव के चलते तीन अन्य आरोपितों आशीष कुमार गुप्ता, अशोक मंडल उर्फ गुड्डू और धनंजय मंगल को दोषमुक्त करते हुए बरी कर दिया गया है।
विभिन्न धाराओं के तहत कारावास और वित्तीय दंड
अदालत ने दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत 9 साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर दोषियों को तीन महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। इसके साथ ही विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत दोनों को 10-10 साल की सजा और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया है। अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में यह स्पष्ट किया है कि दोनों दोषियों की सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
अभियोजन पक्ष की दलीलें और कानूनी प्रक्रिया
अदालत में सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक हेमकांत झा ने मजबूती से पक्ष रखा और दोषियों के खिलाफ कठोर सजा की मांग की। मामले में पेश किए गए गवाहों और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों मुख्य आरोपियों को दोषी माना। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सजा का ऐलान होते ही अदालत परिसर में सुरक्षा व्यवस्था काफी सख्त कर दी गई थी।
तीन मार्च की वह खौफनाक रात और जनहानि
यह पूरा मामला 3 मार्च 2022 को तातारपुर थाना क्षेत्र के काजवली चक स्थित एक इमारत में हुए अत्यंत भीषण बम विस्फोट से संबंधित है। उस समय हुए इस भयानक हादसे में 14 लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य घायल ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इस घटना में 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलसकर घायल भी हुए थे।
राज्य के सबसे बड़े हादसों में शामिल थी घटना
काजवली चक में हुआ यह विस्फोट बिहार के हालिया इतिहास में सबसे बड़े बम धमाकों में से एक माना जाता है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। इस घटना के बाद से ही पुलिस प्रशासन और जांच एजेंसियां लगातार मामले की तहकीकात में जुटी हुई थीं। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले से पीड़ितों और उनके परिजनों को आखिरकार न्याय मिला है।


पंजाब कांग्रेस में हलचल तेज, बैठक टलने के बाद अचानक फिर बुलाई गई
सरकार से संवाद की पहल, सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने के लिए रखी शर्त