मनीला। भारत ने एक बार फिर एक मुक्त, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को मजबूती से रेखांकित किया है। फिलीपींस की राजधानी में आयोजित क्वाड समूह के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि इस पूरे इलाके में आसियान की केंद्रीयता और प्रमुख भूमिका को स्वीकार करना भारत की मुख्य प्राथमिकताओं में शामिल है। इस उच्चस्तरीय बैठक में भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने भी शिरकत की। गौरतलब है कि इससे पहले मई के अंत में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों का सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।

क्वाड बैठक में भारतीय विदेश मंत्री का रुख

सम्मेलन के दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने क्षेत्रीय परिस्थितियों का मूल्यांकन करते हुए हालिया घटनाक्रमों और साझा हितों से जुड़े मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया। उन्होंने पूर्व में हुए सम्मेलनों के निर्णयों की समीक्षा करते हुए बताया कि क्वाड साझेदार एक नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और खुले हिंद-प्रशांत के प्रति पूरी तरह संकल्पबद्ध हैं। इस दौरान उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि क्षेत्र के विकास और स्थिरता के लिए दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन यानी आसियान को केंद्र में रखना अनिवार्य है।

आसियान की केंद्रीयता पर क्वाड का संयुक्त दृष्टिकोण

आसियान से जुड़े विभिन्न क्षेत्रीय मंचों में भाग लेने पहुँचे क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त वक्तव्य जारी कर अपनी प्राथमिकताओं को साझा किया। सभी सदस्य देशों ने स्पष्ट किया कि वे आसियान की एकजुटता और इसके नेतृत्व का बिना किसी शर्त के समर्थन करते हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और सामरिक दखल के बीच क्वाड मंत्रियों का यह एकजुट रुख शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सभी देशों ने आसियान दृष्टिकोण (एओआईपी) को व्यावहारिक रूप से लागू करने पर सहमति व्यक्त की।

सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के नए आयाम

सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन, आर्थिक मजबूती और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में तालमेल बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके साथ ही आपदा प्रबंधन और मानवीय सहायता जैसे संवेदनशील विषयों पर भी क्वाड देशों ने एकसाथ काम करने का इरादा जताया। संयुक्त घोषणापत्र में यह साझा विश्वास जताया गया कि समुद्री क्षेत्र में शांति और निरंतर स्थिरता ही संपूर्ण हिंद-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक प्रगति, सुरक्षा और दीर्घकालिक समृद्धि की सबसे मजबूत नींव है।