पंचकूला। हरियाणा के बहुचर्चित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 657 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले के मामले में गिरफ्तार किए गए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी आईएएस अधिकारी की नियमित जमानत याचिका पर पंचकूला स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अदालत के समक्ष दोनों पक्षों की दलीलें रखी गईं, जहां जांच एजेंसी ने आरोपी अधिकारी की जमानत का पुरजोर विरोध करते हुए कई गंभीर तथ्य पेश किए, जिससे उनकी मुश्किलें और अधिक गहरी होती नजर आ रही हैं।

सीबीआई ने जमानत याचिका का किया कड़ा विरोध, मास्टरमाइंड रिभव ऋषि का करीबी सहयोगी होने का लगाया आरोप

सीबीआई ने अदालत में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी पंकज अग्रवाल की नियमित जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया है। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि आरोपी अधिकारी इस पूरे बहुचर्चित घोटाले के मुख्य सूत्रधार और चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के पूर्व अधिकारी रिभव ऋषि के बेहद करीबी सहयोगियों में शामिल रहे हैं। सीबीआई के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई है कि पंकज अग्रवाल ने इस संबंध के जरिए मुख्य आरोपी से विभिन्न प्रकार के आर्थिक और अन्य अनुचित लाभ भी प्राप्त किए हैं, जो इस बड़े आपराधिक षड्यंत्र में उनकी संलिप्तता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव रहते हुए बैंक खाता खोलने के प्रस्ताव को दी थी मंजूरी, घोटाले में हुई थी अहम भूमिका

जांच एजेंसी के दस्तावेजों के अनुसार, पंकज अग्रवाल ने 10 दिसंबर 2024 से 16 जून 2025 के बीच स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। इसी समयावधि के दौरान, 17 दिसंबर 2024 को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक द्वारा हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद (HSSPP) का नया बैंक खाता खोलने से जुड़ा एक प्रस्ताव भेजा गया था। आरोप है कि आईएएस अधिकारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इस संदेहास्पद और नुकसानदेह प्रस्ताव को तुरंत अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद इस विशालकाय घोटाले को अंजाम देने का रास्ता साफ हुआ था।

विशेष अदालत में मामले की सुनवाई जारी, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक भूमिका पर टिकी हैं सबकी निगाहें

पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में चल रही इस कानूनी प्रक्रिया के दौरान मामले के हर पहलू की गहराई से समीक्षा की जा रही है। इस करोड़ों रुपये के बैंक घोटाले ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है क्योंकि इसमें एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की सीधी संलिप्तता सामने आई है। अदालत यह तय करने में जुटी है कि उपलब्ध साक्ष्यों और सीबीआई द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के आधार पर आरोपी अधिकारी को राहत दी जाए या नहीं। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई और न्यायालय के रुख पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी हुई हैं।