IAS तुकाराम मुंढे के खिलाफ फडणवीस से शिकायत, लगे गंभीर आरोप
मुंबई। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा मिलावट के विरुद्ध की गई सख्त कार्रवाई के पश्चात, आगामी गणेशोत्सव व अन्य धार्मिक पर्वों पर महाप्रसाद और भंडारे के आयोजन को लेकर नए नियम सामने आए हैं, जिसके कारण विवाद उत्पन्न हो गया है। FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा सुरक्षा मानकों को लेकर जारी की गई नियमावली का राज्य के विभिन्न मंदिरों के ट्रस्टों और महाराष्ट्र मंदिर महासंघ ने कड़ा विरोध जताया है। इस पूरे मामले को लेकर मंदिर प्रबंधकों ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।
नियमों की अनिवार्यता पर विवाद
मंदिर समितियों और विभिन्न ट्रस्टों का यह तर्क है कि धार्मिक उत्सवों के दौरान श्रद्धालुओं की श्रद्धा से होने वाले महाप्रसाद वितरण पर व्यावसायिक होटलों या प्रतिष्ठानों की भांति नियम थोपना अनुचित है। उनका यह कहना है कि वे स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा के मानकों का सम्मान करते हैं, परंतु इन नियमों को सभी धर्मों के सार्वजनिक आयोजनों तथा पर्वों पर एक समान रूप से लागू किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री के पास पहुंची शिकायत
विभिन्न मंदिरों के प्रतिनिधियों ने यह आरोप लगाया है कि एफडीए के नए दिशा-निर्देशों से विशेष रूप से हिंदू धार्मिक आयोजनों को प्रभावित किया जा रहा है। नागपुर के जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजी गई इस शिकायत में यह प्रमुख मांग उठाई गई है कि प्रशासन को दोहरे मापदंड अपनाने से बचना चाहिए तथा सभी समुदायों के आयोजनों के लिए एक जैसी नीति होनी चाहिए।
एफडीए आयुक्त का स्पष्टीकरण
इस गर्माते विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए एफडीए आयुक्त ने यह स्पष्ट किया है कि विभाग का उद्देश्य किसी भी उत्सव की रूपरेखा में हस्तक्षेप करना नहीं है। वर्ष 2011 से प्रभावी खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत यह सुनिश्चित करना ही प्रशासन का प्राथमिक दायित्व है कि नागरिकों तक पहुँचने वाला भोजन पूरी तरह सुरक्षित हो। विभाग के अनुसार यह व्यवस्था शादियों, भंडारों, ईद, क्रिसमस और अन्य सभी बड़े सार्वजनिक आयोजनों पर समान रूप से लागू होती है।
निरंतर निगरानी के लिए विशेष कैलेंडर
खाद्य पदार्थों में मिलावट रोकने के अपने अभियानों को आगे बढ़ाते हुए प्रशासन ने पूरे वर्ष के लिए एक विशेष 'त्योहार प्रवर्तन कैलेंडर' तैयार किया है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य विभिन्न उत्सवों के दौरान बनने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता पर कड़ी नजर बनाए रखना है, ताकि किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य हानि से बचा जा सके।
कार्रवाई के आंकड़े
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में नियमों का उल्लंघन करने वाले हजारों व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर शिकंजा कसा गया है। गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने वाली कई इकाइयों को सुधार नोटिस जारी करने के साथ ही संदिग्ध लाइसेंसों को निलंबित करने की कार्रवाई भी की गई है, जिसके अंतर्गत दवा निर्माण इकाइयों और खान-पान से जुड़े अन्य संस्थानों पर भी नियमानुसार प्रतिबंध लगाए गए हैं।


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