लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सीटों के गणित को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक दावे के बाद जहां एनडीए (NDA) के सहयोगियों के बीच हलचल बढ़ी है, वहीं इंडिया (INDIA) गठबंधन के भीतर भी कांग्रेस ने सीटों के बंटवारे को लेकर अपना रुख कड़ा कर दिया है।

अखिलेश यादव का 162 सीटों वाला गणित

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी को अपने सहयोगी दलों—सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा), राष्ट्रीय लोकदल (रालोद), निषाद पार्टी और अपना दल (एस)—के लिए कुल 162 सीटें छोड़नी पड़ेंगी। जानकार इसे एनडीए गठबंधन पर रणनीतिक दबाव बनाने के कदम के तौर पर देख रहे हैं, ताकि भाजपा और उसके सहयोगियों के बीच सीटों की खींचतान सामने आ सके।

कांग्रेस का दबाव: 2024 के लोकसभा प्रदर्शन को आधार बनाने की मांग

उधर, कांग्रेस ने भी सपा के साथ सीटों के बंटवारे पर बराबरी और सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग तेज कर दी है। पार्टी का कहना है कि 2027 के चुनाव के लिए केवल 2022 के विधानसभा नतीजों को आधार नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि 2024 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को ध्यान में रखना जरूरी है। कांग्रेस सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में सर्वे करा रही है ताकि अपनी मजबूत स्थिति वाले प्रत्याशियों को मैदान में उतारा जा सके।

जयंत और राजभर के बयानों से गरमाई सियासत

एनडीए की ओर से सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर और रालोद अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने सपा पर सहयोगी दलों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। इस बीच, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने भी सपा के साथ अपने पुराने गठबंधनों के कड़वे अनुभवों का हवाला देते हुए जयंत चौधरी के बयान का समर्थन किया है।

पिछला प्रदर्शन और मौजूदा समीकरण

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 376 सीटों पर चुनाव लड़कर 255 सीटें हासिल की थीं, जबकि उसके सहयोगियों को 27 सीटें मिली थीं। सपा ने 111 सीटें जीती थीं और उसके तत्कालीन सहयोगी रालोद को 8 और सुभासपा को 6 सीटें हासिल हुई थीं।

अब बदले हुए सियासी समीकरणों में रालोद और सुभासपा एनडीए का हिस्सा हैं, जबकि कांग्रेस और सपा मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। ऐसे में दोनों बड़े गठबंधनों के लिए सीटों का सर्वसम्मत फॉर्मूला तैयार करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।