अमेरिकी टैरिफ नियमों से भारत ने ऐसे निकाला रास्ता, जानिए Section 301 की कहानी
नई दिल्ली: अमेरिका ने जबरन श्रम की रोकथाम से जुड़े मुद्दे पर भारत सहित दुनिया भर की 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए कड़े आयात शुल्क (टैरिफ) लागू करने की घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त निर्देशों के तहत अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने यह बड़ा निर्णय लिया है। हालांकि, भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की बात यह है कि अमेरिकी व्यापार कानून के 'सेक्शन 301' के तहत भारत पर 12.5% की भारी दर के स्थान पर केवल 10% का टैरिफ ही लगाया गया है, जिससे भारतीय व्यापार को एक बड़े झटके से बचा लिया गया है।
अमेरिका का व्यापार कानून 1974 और जांच का मुख्य कारण
यह पूरा मामला अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 के 'सेक्शन 301' से जुड़ा हुआ है। यह कानून अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को अधिकार देता है कि यदि कोई देश ऐसी व्यापारिक नीतियां अपनाता है जिससे अमेरिकी वाणिज्य को नुकसान पहुंचता है, तो उस पर दंडात्मक शुल्क लगाया जा सकता है। इसी के तहत मार्च 2026 में भारत समेत 60 देशों के खिलाफ जांच शुरू की गई थी। जांच का मूल आधार यह था कि ये देश जबरन श्रम से तैयार होने वाले सामानों की रोकथाम और उससे संबंधित कड़े नियम लागू करने में पूरी तरह सफल नहीं हो पा रहे थे।
सफल कूटनीति से भारत को मिली उच्च टैरिफ से राहत
शुरुआती दौर में माना जा रहा था कि जांच के बाद भारत को भी 12.5% की उच्च टैरिफ श्रेणी में शामिल किया जाएगा, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद काफी महंगे हो जाते। हालांकि, भारतीय अधिकारियों ने समय रहते अमेरिकी प्रशासन के साथ प्रभावी और रणनीतिक बातचीत शुरू की। इस वार्ता में भारत में श्रम मानकों और प्रथाओं में किए जा रहे सकारात्मक सुधारों को मजबूती से पेश किया गया। इस कूटनीतिक पहल के परिणामस्वरूप अमेरिकी प्रशासन ने भारत की दलीलों को स्वीकार किया और भारत को 10% की कम टैरिफ श्रेणी में जगह दी।
10 प्रतिशत टैरिफ श्रेणी में भारत के साथ शामिल अन्य देश
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की अंतिम रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन 17 अर्थव्यवस्थाओं का हिस्सा है जिन पर 10% का निचला टैरिफ लागू होगा। इस सूची में भारत के साथ ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया, मैक्सिको, बांग्लादेश, मलेशिया, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देश शामिल हैं। इसके विपरीत, अन्य प्रभावित देशों पर सीधा 12.5% का टैरिफ लगाया गया है। यह नई टैरिफ व्यवस्था 24 जुलाई 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।
अमेरिकी रुख और भारतीय निर्यात पर इसका भावी प्रभाव
अमेरिकी व्यापार राजदूत जेमिसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि केवल अपील करने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जबरन श्रम को खत्म नहीं किया जा सका, इसलिए यह कदम उठाना पड़ा। हालांकि, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ आवश्यक कच्चे माल को इस टैरिफ से अलग रखा गया है। वैश्विक स्तर पर 60 देशों पर पड़े इस आर्थिक दबाव के बीच भारत ने सही समय पर प्रभावी रणनीति बनाकर खुद को बड़े नुकसान से बचा लिया है, हालांकि 10% का यह शुल्क आने वाले समय में भारतीय निर्यात को किस तरह प्रभावित करता है, इस पर विशेषज्ञों की नजर रहेगी।


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