GDP विवाद में नीलकंठ मिश्रा की एंट्री, 2.6% के दावे को बताया ‘स्पष्ट रूप से गलत’
भारत की पहली तिमाही में दर्ज 7.8 प्रतिशत की आर्थिक विकास दर (जीडीपी) को लेकर शुरू हुए विवाद पर विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पहली तिमाही की वास्तविक वृद्धि दर केवल 2.6 प्रतिशत होने के दावों को पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक करार दिया। मिश्रा ने स्पष्ट किया कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि सांख्यिकीय हेरफेर पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर मजबूत आर्थिक गतिविधियों, रिकॉर्ड वाहन बिक्री और मजबूत टैक्स संग्रह पर आधारित है।
आधार वर्ष और आंकड़ों के संशोधन पर स्पष्टीकरण
पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के उस तर्क को खारिज करते हुए, जिसमें उन्होंने आधार कीमतों में संशोधन को वृद्धि दर अधिक दिखने की वजह बताया था, नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि आर्थिक आंकड़ों की समझ रखने वाले जानते हैं कि बेस रिवीजन की स्थिति पहले ही साफ हो चुकी थी। नई सांख्यिकी श्रृंखला ने गणना पद्धति को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाया है, जिससे देश के वास्तविक उत्पादन आंकड़ों की विश्वसनीयता और अधिक पुष्ट हुई है।
जमीनी आर्थिक मजबूती के ठोस प्रमाण
मिश्रा ने अर्थव्यवस्था की गतिशीलता को दर्शाने वाले कई प्रमुख आंकड़े रेखांकित किए, जिनमें किसी प्रकार के बदलाव की गुंजाइश नहीं होती:
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ऑटोमोबाइल क्षेत्र में उछाल: अगस्त माह में कारों और एसयूवी के घरेलू डिस्पैच में सालाना आधार पर 35 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, दोपहिया वाहनों की बिक्री में 20 प्रतिशत और वाणिज्यिक वाहनों (कमर्शियल व्हीकल्स) के उठाव में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज हुई।
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कर संग्रह और ऋण प्रवाह: प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर संग्रह में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। साथ ही, बैंकों द्वारा ऋण वितरण (क्रेडिट ग्रोथ) के आंकड़े भी उम्मीद से कहीं बेहतर रहे हैं।
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बुनियादी ढांचा व निजी निवेश: निर्माण क्षेत्र से जुड़े संकेतक लगातार सकारात्मक बने हुए हैं, जो यह साबित करते हैं कि निजी क्षेत्र के पूंजीगत निवेश में मजबूती आ रही है।
भविष्य की संभावनाएं और शेष चुनौतियां
विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक के अनुसार, देश में अनुकूल मौद्रिक नीतियों और बजटीय अवरोधों के कम होने से मध्यम अवधि में औसत वृद्धि दर 7 से 7.5 प्रतिशत के स्तर पर बनी रह सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी इंगित किया कि वास्तविक मजदूरी की धीमी वृद्धि दर श्रम बाजार में कुछ शिथिलता को दर्शाती है। इस अंतर को पाटने के लिए अर्थव्यवस्था को आगामी कई तिमाहियों तक निरंतर उच्च विकास दर बनाए रखने की आवश्यकता होगी।


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