जयपुर। राजस्थान में नगरीय निकाय चुनावों के तहत नामांकन पत्रों की संवीक्षा और नाम वापसी की मियाद पूरी होने के बाद चुनावी परिदृश्य स्पष्ट हो गया है। प्रदेश के 10,245 वार्डों में कुल 38,891 प्रत्याशी अपनी राजनीतिक किस्मत आजमा रहे हैं, जबकि 77 प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं। नामांकन खारिज होने और टिकट वितरण के बाद उपजी बगावत ने सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस दोनों के लिए समीकरण जटिल कर दिए हैं।

नामांकन और नाम वापसी के प्रमुख आंकड़े

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार:

  • कुल नामांकन पत्र दाखिल: 69,811

  • जांच के दौरान खारिज पर्चे: 17,137

  • नाम वापस लेने वाले प्रत्याशी: 10,112

  • निर्विरोध निर्वाचित: 77 प्रत्याशी

  • मैदान में शेष कुल प्रत्याशी: 38,891

पर्चे खारिज होने से भाजपा और कांग्रेस को झटका

लगभग 20 जिलों से प्राप्त संकलित आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख दलों के कम से कम 99 प्रत्याशियों के नामांकन तकनीकी त्रुटियों, अपूर्ण दस्तावेजों या पात्रता नियमों के चलते निरस्त हो गए। इनमें कांग्रेस के 57 और भाजपा के 42 उम्मीदवार शामिल हैं (जबकि पूरे प्रदेश में यह संख्या लगभग 200 तक आंकी जा रही है)। अजमेर और पाली में कांग्रेस को बड़ा नुकसान हुआ, तो वहीं दौसा और करौली में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों के पर्चे खारिज होने से झटका लगा है। इसने दलों की आंतरिक स्क्रीनिंग और कानूनी जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

बागियों ने बिगाड़े समीकरण; मान-मनौव्वल में जुटे शीर्ष नेता

टिकट वितरण से असंतुष्ट कई स्थानीय नेता व कार्यकर्ता पार्टी से बगावत कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ताल ठोक रहे हैं।

  • कांग्रेस की रणनीति: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित वरिष्ठ नेताओं को असंतुष्टों से सीधा संवाद करने का जिम्मा सौंपा गया है। पार्टी को आशंका है कि बागियों की मौजूदगी से पारंपरिक मतों का विभाजन होगा, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिल सकता है।

  • भाजपा की कवायद: भाजपा में भी टिकट बंटवारे को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध के स्वर मुखर हैं। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष के राजस्थान दौरे की संभावनाओं के बीच संगठन के वरिष्ठ नेता असंतोष को शांत करने और अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं।

कई वार्डों में त्रिकोणीय और बहुकोणीय मुकाबले के आसार

चुनावी मैदान में 38 हजार से अधिक प्रत्याशियों के डटे रहने से अधिकांश वार्डों में मुकाबला द्विध्रुवीय न रहकर त्रिकोणीय और बहुकोणीय बन गया है। चूंकि स्थानीय निकाय चुनावों में जीत-हार का अंतर अमूमन बेहद कम वोटों का होता है, इसलिए निर्दलीय और बागी प्रत्याशी दोनों ही प्रमुख दलों के अधिकृत उम्मीदवारों की जीत के गणित को सीधे प्रभावित कर सकते हैं।