रोहतक में पराली प्लांट बना आग का शिकार, संचालक ने जताया भारी नुकसान
हिसार:हरियाणा के हिसार रोड स्थित बहुअकबरपुर गांव में संचालित एक पुराली प्रोसेसिंग प्लांट (पावर वेंचर) में बुधवार देर रात उस समय बड़ा हादसा हो गया, जब वहाँ अचानक भीषण आग लग गई। रात के करीब दो बजे जब पूरा इलाका गहरी नींद में सोया हुआ था, तभी प्लांट के मुख्य हिस्से से आग की गगनचुंबी लपटें उठने लगीं। उस वक्त प्लांट परिसर के भीतर कई श्रमिक सो रहे थे, जिन्हें धुआं और गर्मी महसूस होने पर आंखें खुलीं। स्थिति को भांपते हुए सभी मजदूरों ने मुस्तैदी दिखाई और तुरंत वहां से भागकर अपनी जान बचाई, जिससे एक बहुत बड़ा जानी नुकसान होने से टल गया।
केमिकल और पुराली के कारण तेजी से फैली लपटें, दमकल की गाड़ियां घंटों जूझती रहीं
हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सूचना मिलने के तुरंत बाद दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) की तीन बड़ी गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं। प्लांट में भारी मात्रा में सूखी पुराली और तैयार गिट्टी (पैलेट्स) का स्टॉक मौजूद होने के कारण आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। वीरवार सुबह नौ बजे तक भी दमकल कर्मी आग पर पूरी तरह काबू पाने के लिए लगातार संघर्ष करते रहे। प्रारंभिक जांच और चश्मदीदों के अनुसार, इस भयंकर अग्निकांड की मुख्य वजह प्लांट के मुख्य विद्युत पैनल में हुआ अचानक शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है।
एक एकड़ में फैला था थर्मल पावर प्लांट को ईंधन सप्लाई करने वाला यह उद्योग
पीड़ित प्लांट मालिक आशीष, जो कि बहुअकबरपुर के ही निवासी हैं, ने बताया कि उन्होंने करीब एक साल पहले गांव की एक एकड़ भूमि में इस पुराली से गिट्टी बनाने वाले आधुनिक प्लांट की स्थापना की थी। इस प्लांट का मुख्य कार्य खेतों से निकलने वाली पुराली को प्रोसेस करके ईंधन योग्य गिट्टी में तब्दील करना था, जिसकी सप्लाई आगे झाड़ली स्थित बड़े पावर प्लांट में की जाती थी। इस तैयार गिट्टी का उपयोग पावर प्लांटों में बिजली उत्पादन के लिए कोयले के साथ मिलाकर एक वैकल्पिक और पर्यावरण अनुकूल ईंधन के रूप में किया जाता था।
लाखों रुपये का तैयार माल और मशीनरी जलकर राख, पीड़ित ने की मुआवजे की मांग
इस दर्दनाक हादसे में प्लांट मालिक को बेहद भारी वित्तीय चोट पहुंची है। देर रात लगी इस आग की वजह से प्लांट के भीतर रखा टन के हिसाब से तैयार माल, कच्ची पुराली और वहां लगी कीमती मशीनें तथा विद्युत पैनल पूरी तरह जलकर खाक हो गए हैं। प्लांट संचालक के शुरुआती आकलन और दावे के मुताबिक, इस अग्निकांड के कारण उन्हें लगभग 40 लाख रुपये से अधिक का सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। पीड़ित व्यवसायी ने प्रशासन और संबंधित विभाग से नुकसान का उचित जायजा लेकर जल्द से जल्द आर्थिक मुआवजा देने की गुहार लगाई है।


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