नांदेड़: महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले से एक रूह कंपा देने वाली और अत्यंत दुखद घटना सामने आई है। मुदखेड़ तहसील के आमदुरा में शुक्रवार की सुबह एक स्कूल शिक्षक ने अपने दो मासूम बच्चों के साथ कथित तौर पर अपनी कार को गोदावरी नदी में गिरा दिया, जिससे तीनों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। प्रथम दृष्टया इस पूरे मामले को आत्महत्या से जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि वारदात से महज एक दिन पहले ही शिक्षक ने सोशल मीडिया पर मानसिक प्रताड़ना का जिक्र करते हुए एक नोट साझा किया था।

पुल की सुरक्षा रेलिंग तोड़ते हुए नदी में समाई तेज रफ्तार कार

घटनाक्रम के अनुसार, मूल रूप से भोकर तहसील के बेंबर गांव के रहने वाले सुनील मोरे हिमायतनगर के पोटा बुद्रुक स्थित जिला परिषद स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। शुक्रवार की सुबह वह अपनी 12 वर्षीय बेटी सारी और 8 वर्षीय बेटे सुमित को कार में बैठाकर अमदुरा-पुणेगांव रोड से गुजर रहे थे। इसी दौरान गोदावरी नदी पर बने पुल पर पहुंचते ही उनकी कार अचानक बेकाबू हो गई और पुल की मजबूत साइड रेलिंग को कंक्रीट सहित तोड़ती हुई सीधे उफनती नदी के गहरे पानी में समा गई। इस खौफनाक मंजर को देखकर राहगीरों ने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीम ने क्रेन की मदद से कार और तीनों शवों को नदी से बाहर निकाला।

व्हाट्सऐप स्टेटस पर साझा किया था प्रताड़ना का सुसाइड नोट

इस सामूहिक आत्महत्या के पीछे की मुख्य वजह शिक्षक द्वारा वारदात से ठीक एक दिन पहले अपने व्हाट्सऐप स्टेटस पर लगाया गया सुसाइड नोट माना जा रहा है। सुनील मोरे ने अपने इस डिजिटल नोट में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर बेहद गंभीर और संवेदनशील आरोप लगाए थे। उन्होंने लिखा था कि वह हदगांव के समूह शिक्षा अधिकारी और संबंधित केंद्र प्रमुख द्वारा किए जा रहे कथित प्रशासनिक उत्पीड़न और मानसिक तनाव से बुरी तरह तंग आ चुके हैं और अब उनके पास जीवन समाप्त करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। इस नोट के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग के भीतर भी हड़कंप मच गया है।

एक ही स्कूल में पढ़ाते थे पति-पत्नी, परिवार में पसरा मातम

पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो मृतक सुनील मोरे जिस जिला परिषद स्कूल में अपनी सेवाएं दे रहे थे, संयोगवश उनकी धर्मपत्नी भी उसी विद्यालय में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं। एक ही झटके में पति और दोनों होनहार बच्चों को खो देने के बाद मृतका की पत्नी और अन्य रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे गांव और शिक्षक समुदाय में इस घटना के बाद से गहरा सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है। सहकर्मियों का कहना है कि सुनील स्वभाव से बेहद शांत और कर्तव्यनिष्ठ शिक्षक थे, लेकिन विभागीय दबाव ने उन्हें इतना आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

पुलिस ने मामला दर्ज कर विभागीय अधिकारियों के खिलाफ शुरू की जांच

स्थानीय कोतवाली पुलिस ने इस दर्दनाक हादसे के संबंध में आकस्मिक मृत्यु और सुसाइड नोट के आधार पर मामला पंजीकृत कर लिया है। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष जांच दल का गठन किया गया है जो सुसाइड नोट में नामजद दोनों वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों की भूमिका और उनके द्वारा दिए जा रहे कथित तनाव की गहनता से पड़ताल करेगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मृतक के मोबाइल फोन और डिजिटल साक्ष्यों को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है, और इस मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा तथा जल्द ही मामले की पूरी हकीकत सबके सामने लाई जाएगी।