हरदोई। जिले के बेनीगंज कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत महुआ कोला गांव में बिना प्रशासनिक मंजूरी के एक मंदिर में महात्मा बुद्ध की प्रतिमा स्थापित किए जाने को लेकर भारी बवाल हो गया। बुधवार को हुई इस घटना के बाद जब प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर समझा-बुझाकर मूर्ति हटवाने पहुंचे, तो देर रात ग्रामीण उग्र हो गए। उपद्रवियों ने पुलिस टीम पर लाठी-डंडों, सरियों और पत्थरों से हमला कर दिया, जिसमें दो सिपाही गंभीर रूप से जख्मी हो गए और कई सरकारी गाड़ियों के शीशे टूट गए। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े। पुलिस ने मौके से 10 दंगाइयों को गिरफ्तार किया है।

निजी जमीन पर बने खाली मंदिर में रखी गई प्रतिमा

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, गांव के रहने वाले पुत्तीलाल मौर्य ने करीब तीन साल पहले अपनी निजी जमीन पर एक मंदिर बनवाया था, जो तब से खाली पड़ा था। बुधवार सुबह करीब 11 बजे लखनऊ से आए कुछ बाहरी युवकों ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर बिना किसी पूर्व अनुमति के मंदिर में महात्मा बुद्ध की प्रतिमा स्थापित कर दी। गांव की महिला चौकीदार द्वारा सूचना दिए जाने पर संडीला की ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नारायणी भाटिया और सीओ अजीत चौहान भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और कानूनी दस्तावेज मांगे।

रात में अचानक भड़की हिंसा, पुलिस को छावनी में बदला गांव

अधिकारियों द्वारा समझाने-बुझाने का दौर रात 11 बजे तक चलता रहा। जब पुलिस ने अवैध रूप से रखी प्रतिमा को हटाने के लिए कड़ा रुख अपनाया, तो भीड़ में शामिल अराजक तत्वों ने अचानक पथराव शुरू कर दिया। चारों तरफ मची अफरातफरी के बीच पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को खदेड़ा।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी अनुनय झा और पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार मीणा आधी रात को ही भारी पुलिस बल के साथ महुआ कोला पहुंचे। पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और प्रतिमा को सुरक्षित हटाकर बेनीगंज कोतवाली में रखवा दिया गया है। इस हिंसक झड़प में आरक्षी भावना और अतुल घायल हुए हैं, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों ने बिगाड़ा माहौल

अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया पर विभिन्न भ्रामक पोस्ट डालकर लोगों को गांव पहुंचने के लिए उकसाया गया, जिसने आग में घी का काम किया। भीड़ में शामिल लोग अधिकारियों से अभद्रता और आपत्तिजनक टिप्पणियां करने लगे थे। अगर पुलिस समय रहते सख्ती नहीं दिखाती, तो बड़ा हादसा हो सकता था क्योंकि हमलावरों के पास लोहे की रॉड और धारदार हथियार भी थे।

दो अलग-अलग मुकदमों में 53 लोग नामजद, सैकड़ों अज्ञात

इस पूरे उपद्रव को लेकर पुलिस ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। बेनीगंज पुलिस की तरफ से 38 नामजद और कई अज्ञात लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में पहली प्राथमिकी दर्ज की गई है। वहीं, गांव के ही अरविंद मौर्या की शिकायत पर 15 नामजद और 30 अज्ञात लोगों के खिलाफ दूसरा मुकदमा दर्ज हुआ है। अरविंद का आरोप है कि जब उन्होंने मंदिर के पास अपनी जमीन पर मवेशी बांधने के दौरान जबरन मूर्ति रखने का विरोध किया, तो आरोपियों ने उनके साथ भी मारपीट की। पुलिस अब तक रिंकू, राम मूरत, अनुज और शिवम मौर्या समेत 10 आरोपियों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज चुकी है और बाकी उपद्रवियों की तलाश में दबिश दे रही है।

पहले भी हो चुका है इस जगह विवाद

महुआ कोला गांव में प्रतिमा स्थापित करने को लेकर पुराना विवाद रहा है। इससे पहले 5 जून 2023 को भी इसी तरह बिना अनुमति के मूर्ति रखने का प्रयास हुआ था, जिसे प्रशासन ने समय रहते हटवा दिया था। ग्रामीणों के अनुसार, साल 2011 में भी बुद्ध विहार में प्रतिमा रखने को लेकर दो पक्षों में हिंसक टकराव हुआ था, जिसमें गोलीबारी तक की नौबत आ गई थी। जिलाधिकारी ने साफ चेतावनी दी है कि माहौल खराब करने वाले किसी भी शरारती तत्व को बख्शा नहीं जाएगा।