धमतरी में नरकंकाल मिलने के बाद ग्रामीणों का प्रदर्शन, निष्पक्ष जांच की मांग
धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के खरेंगा गांव में रेत खदान से अचानक भारी मात्रा में इंसानी हड्डियों और नरकंकाल मिलने से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि रेत माफियाओं द्वारा नियमों को ताक पर रखकर वर्षों पुराने पारंपरिक श्मशान घाट की जमीन पर अवैध रूप से भारी मशीनों से खुदाई की जा रही थी, जिसके कारण यह बेहद संवेदनशील और स्तब्ध करने वाली स्थिति पैदा हुई है। इस घटना ने जिला प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।
मनरेगा कार्य के दौरान हुआ खौफनाक खुलासा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को खरेंगा गांव में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत काम चल रहा था। इसी बीच कुछ ग्रामीणों को खबर मिली कि शमशान घाट के पास अवैध रूप से रेत की निकासी की जा रही है और खुदाई में मानव अवशेष बाहर आ रहे हैं।
जब ग्रामीण एकजुट होकर मौके पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। नदी किनारे अलग-अलग जगहों पर इंसानी कंकाल और हड्डियां बिखरी पड़ी थीं। वहां रेत से लदे दो से तीन ट्रैक्टर भी खड़े थे, जिनके चालक ग्रामीणों की भारी भीड़ को आते देखकर गाड़ियां छोड़कर मौके से दुम दबाकर भाग निकले।
दूसरे घाट की रॉयल्टी पर चल रहा था काला खेल
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से सीमांकन के विवादों के बीच अवैध खनन का काला कारोबार फल-फूल रहा है। अब तक खदान से करीब 10 से अधिक नरकंकाल मिलने की पुष्टि की जा रही है, जिनमें से कुछ अवशेष काफी नए प्रतीत हो रहे हैं। ग्रामीणों ने तत्काल प्रभाव से इस अवैध उत्खनन को रोकने की मांग की है। उनका आरोप है कि बाहरी रेत माफिया दूसरे स्वीकृत घाटों की रॉयल्टी (पर्ची) का गलत इस्तेमाल करके यहाँ अवैध रूप से पोकलेन और जेसीबी मशीनों से खुदाई करवा रहे हैं।
पंचायत के प्रतिबंध के बाद भी बेखौफ रहे माफिया
ग्राम विकास समिति के सदस्य सुभाष साहू ने बताया कि खुदाई में निकले कुछ शवों के अवशेष हाल-फिलहाल के लग रहे हैं, जिससे पूरे गांव में डर और आक्रोश का माहौल है। वहीं, ग्राम सरपंच नीलम साहू ने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को लेकर पहले भी पंचायत और विकास समिति की आपात बैठकें हो चुकी हैं। गांव में बकायदा मुनादी (ढिंढोरा) पिटवाकर शमशान घाट क्षेत्र से रेत निकालने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन इसके बावजूद धमतरी क्षेत्र के रसूखदार माफिया स्थानीय मजदूरों का इस्तेमाल कर धड़ल्ले से खनन कर रहे थे। पंचायत अब इस पूरे मामले की लिखित शिकायत जिला कलेक्टर से कर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करेगी।
प्रभारी मंत्री के दावों की खुली पोल
गौरतलब है कि अभी कुछ दिनों पहले ही धमतरी पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा से मीडिया ने इलाके में लगातार हो रहे अवैध रेत उत्खनन पर सवाल दागे थे। तब मंत्री ने दावा किया था कि सरकार इस मामले में बेहद सख्त है और अवैध परिवहन करने वाली गाड़ियों को लगातार सीज किया जा रहा है। लेकिन खरेंगा गांव की इस ताजा और हृदयविदारक घटना ने प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के अंतर को उजागर कर दिया है।


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